इफको के एक रिटायर्ड अधिकारी को झांसे में लेकर करोड़ों रुपये के दो मकान हड़पने के आरोपी योगेश तिवारी को झूंसी पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस काफी समय से योगेश की तलाश में जुटी हुई थी। शनिवार देर शाम तक पूछताछ की जाती रही। योगेश पर अन्य जिलों में भी जालसाजी के कई केस दर्ज हैं।
फूलपुर इफको से सेवानिवृत्त अफसर प्रभाष चंद्र गुप्ता ने आवास विकास कालोनी योजना दो में दो एचआईजी मकान खरीदे थे। दोनों की कीमत करोड़ों में बताई गई है। आरोप है कि तकरीबन दो साल पहले योगेश तिवारी ने दिल्ली और मुंबई के बड़े कारोबारियों का जिक्र करते हुए प्रापर्टी को एक बड़े प्रोजेक्ट में शामिल करा लिया। इसके बाद एक सादे कागज पर दस्तखत कराकर प्रापर्टी पर कब्जा जमा लिया। प्रभाष को जब ठगे जाने की जानकारी हुई तो उन्होंने विरोध शुरू कर दिया।
इस पर योगेश ने कई मंत्री और अफसरों की धौंस जमाकर फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देने के साथ ही जान से मारने की धमकी दी। योगेश की हरकत से परेशान प्रभाष ने शिकायत अपर मुख्य सचिव से की। अपर मुख्य सचिव के निर्देश पर आरोपी योगेश तिवारी के खिलाफ झूंसी थाने में केस दर्ज किया गया। पुलिस और क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की तो जालसाजी के कई मामले सामने आए।
मामला आईजी केपी सिंह के पास पहुंचा तो उन्होंने योगेश की गिरफ्तारी का आदेश दिया। पुलिस का दबाव बना तो योगेश अंडरग्राउंड हो गया। शुक्रवार को योगेश के झूंसी में होने की जानकारी झूंसी पुलिस और क्राइम ब्रांच को हुई तो उसे दबोच लिया गया। योगेश तिवारी को हिरासत में लेकर क्राइम ब्रांच पूछताछ कर रही है। पुलिस की मानें तो योगेश पर प्रयागराज के अलावा प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी जालसाजी के कई केस दर्ज हैं।