याची की दलील
- आरोपी बहुत प्रभावशाली हैं, जमानत मिलने पर वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
- अन्य बच्चों के साथ भी शोषण हुआ है।
- आरोपी साक्ष्य से छेड़छाड़ कर सकते हैं।
- सूचक पर हमला हुआ, जिससे खतरे की बात सामने आती है।
- आरोपी जांच के दौरान भी यात्रा (यात्रा/रैली) कर रहे हैं और दबाव बना रहे हैं।
- शंकराचार्य होने का दावा विवादित बताया गया।
कोर्ट का विश्लेषण
- हाई कोर्ट सीधे जमानत दे सकता है विशेष परिस्थितियों में।
- इस केस में Special Judge के आदेश से FIR हुई, इसलिए यह विशेष परिस्थिति मानी गई।
कोर्ट ने कई गंभीर सवाल उठाए
1. एफआईआर दर्ज करने में 6 दिन की देरी, कारण पूजा बताया गया।
2. पीड़ित सूचक के साथ ही रहे, अभिभावकों के पास नहीं थे।
3. पीड़ितों के बयान और प्राथमिकी में तारीख/स्थान अलग-अलग हैं।
4. पीड़ितों ने माता-पिता की बजाय एक अजनबी (सूचक) को बताया, असामान्य व्यवहार।
5. एक पीड़ित घटना के समय बालिग था।
6. मेडिकल रिपोर्ट में कोई स्पष्ट चोट नहीं और निष्कर्ष भी पक्का नहीं।
7. पीड़ित आश्रम के छात्र नहीं बल्कि हरदोई के स्कूल के छात्र थे।
8. मीडिया में पीड़ितों के इंटरव्यू देना पॉक्सो नियमों के खिलाफ है।
9. आरोप और प्रशासनिक विवाद (संगम स्नान) का समय एक ही दिन जो संदेह पैदा करता है।