इलाहाबाद हाईकोर्ट से दुष्कर्म की कोशिश के आरोपी जेलर बागपत को राहत मिली है। कोर्ट ने अगली सुनवाई तिथि या पुलिस रिपोर्ट पर न्यायालय के संज्ञान लेने तक गिरफ्तार पर रोक लगा दी है। साथ ही शिकायतकर्ता सहित राज्य से सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट से दुष्कर्म की कोशिश के आरोपी जेलर बागपत को राहत मिली है। कोर्ट ने अगली सुनवाई तिथि या पुलिस रिपोर्ट पर न्यायालय के संज्ञान लेने तक गिरफ्तार पर रोक लगा दी है। साथ ही शिकायतकर्ता सहित राज्य से सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ व न्यायमूर्ति प्रवीन कुमार गिरि की खंडपीठ ने जेलर जितेंद्र कुमार कश्यप की याचिका पर दिया।
विज्ञापन
जिला कारागार बागपत के जेलर जितेंद्र कुमार कश्यप पर उनकी अधीनस्थ महिला अधिकारी ने खेखरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप लगाया कि एक जनवरी 2025 को जेलर ने उसके साथ अभद्रता करते हुए दुष्कर्म का प्रयास किया। इसकी जानकारी महानिरीक्षक कारागार को फोन से दी। साथ ही इसकी लिखित सूचना चार जनवरी 2025 को कारागार मुख्यालय पर भी की। याची ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
याची के अधिवक्ता आशीष कुमार मिश्र ने दलील दी कि शिकायतकर्ता अधीनस्थ कर्मचारी है। याची के निर्देशों का पालन नहीं करती थी। कड़ाई करने पर झूठे आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया है। न्यायालय ने पक्षों को सुनने के बाद विवेचना में सहयोग करने की शर्त पर गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।