इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कर बचाने की मंशा से माल का कम मूल्य प्रदर्शित कर लाने-ले जाने पर उसे रोका और सीज किया जा सकता है। याची के विरुद्ध कोई विपरीत तथ्य रिकॉर्ड पर आने के बाद अगर उसे अपीलीय अधिकारी के समक्ष चुनौती नहीं दी गई तो बाद में उक्त कार्यवाही को अवैध और मनमाना नहीं कहा जा सकता है। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की पीठ ने जीएसटी विभाग कानपुर की कार्रवाई के खिलाफ दाखिल जया ट्रेडर्स व अन्य चार की याचिका को खारिज कर दिया।
मामले में जया ट्रेडर्स एवं चार अन्य फर्मों का पश्चिम बंगाल और असम से दिल्ली के लिए पान मसाला और तंबाकू का परिवहन किया जाना प्रदर्शित किया गया था, जबकि ड्राइवर ने उक्त माल को कानपुर से लोड किया जाना बताया। सभी बिल 50 हजार रुपये से कम होने के कारण कोई ई-वे बिल नहीं बनाया गया था। जीएसटी सचल दल कानपुर ने ड्राइवर के बयान के आधार पर माना कि व्यापारी ने गलत प्रपत्रों के आधार पर परिवहन दर्शाया है।
व्यापारियों ने पश्चिम बंगाल और असम से माल के परिवहन का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया। इस पर सचल दल अधिकारी ने प्रपत्रों को सही न पाए जाने पर माल का मूल्य निर्धारित करते हुए अनुमानित कीमत पर जीएसटी के नियमानुसार अर्थदंड लगाया, जिसे याची फर्माें ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रविशंकर पांडेय ने दलील दी कि जीएसटी विभाग की ओर से की गई कार्रवाई में कोई भी अवैधता नहीं है। याचियों ने कर चोरी की मंशा से माल का कम मूल्य प्रदर्शित किया है। वहीं फर्म के अधिवक्ता ने जीएसटी विभाग की कार्रवाई को अवैध करार दिया। मामले में न्यायालय ने जीएसटी विभाग की कार्रवाई को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।