इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2.80 करोड़ रुपये के सीसी लिमिट लोन के घोटाले से जुड़े मामले में आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। कहा, राज्य सरकार और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के संबंधित मुख्य शाखा प्रबंधक तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करें।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2.80 करोड़ रुपये के सीसी लिमिट लोन के घोटाले से जुड़े मामले में आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। कहा, राज्य सरकार और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के संबंधित मुख्य शाखा प्रबंधक तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करें। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति डॉ.अजय कुमार-द्वितीय की खंडपीठ ने गिरीश चंद्र गर्ग की याचिका पर दिया।
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गाजियाबाद के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की राइटगंज शाखा के तत्कालीन मुख्य शाखा प्रबंधक सुभाष चंद्र ने 2018 में तीन नामजद समेत अन्य अज्ञात के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर 2.80 करोड़ रुपये की सीसी लिमिट लेकर धन का गबन किया गया। गिरीश चंद्र गर्ग ने एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची 75 वर्षीय व्यापारी है। उनका नाम मूल एफआईआर में नहीं है। ब्यूरो
सीसी लिमिट क्या है
सीसी लिमिट व्यवसायों के लिए बैंक की ओर से प्रदान की जाने वाली एक कार्यशील पूंजी सुविधा है। इसमें पूर्व निर्धारित सीमा तक पैसा जमा और निकाल सकते हैं। यह मुख्य रूप से कच्चे माल की खरीद, सैलरी देने और अन्य दैनिक खर्चों के लिए होती है।