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अखाड़ा परिषद की भी सुनने को तैयार नहीं वासुदेवानंद

Sat, 09 May 2015 10:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
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ज्योतिष्पीठ बद्रिकाश्रम हिमालय के असली शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ही हैं। सिविल कोर्ट के इस फैसले के बावजूद पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती एवं स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के बीच शुरू जंग फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही है। स्वामी वासुदेवानंद किसी समझौते के लिए तैयार नजर नहीं आ रहे हैं। उनकी नाराजगी इसी से समझी जा सकती है कि तमाम प्रयासों के बावजूद अखाड़ा परिषद के पदाधिकारी फोन पर भी स्वामी वासुदेवानंद से संपर्क नहीं साध सके। ऐसे में अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों ने जोशी मठ जाकर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को मनाने का फैसला किया है। जल्द ही परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री जोशी मठ रवाना होंगे।
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परिषद के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरि का कहना है कि सनातन धर्म की गरिमा बरकरार रहे और शंकराचार्य पद के लिए अदालती लड़ाई आगे न बढ़े, इसी में सबकी भलाई है। अगर किसी भी पक्ष को कोई दुविधा हो तो उसे आपस में मिल बैठकर दूर कर लिया जाए। यही बात वासुदेवानंद से भी करना चाहते हैं। फोन पर वासुदेवानंद से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन सीधी बात नहीं हो सकी। ऐसे में अध्यक्ष अब सीधे उनसे मिलकर बात करना चाहते हैं, ताकि आगे की लड़ाई न लड़ने के लिए उन्हें मनाया जा सके। अध्यक्ष के मुताबिक समझौते के लिए परिषद ने अपनी तरफ से शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती से बातचीत की पहल की है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उनके अनुरोध को स्वीकार भी कर लिया है, पर स्वामी वासुदेवानंद से अभी से सीधी बातचीत नहीं हो पा रही है। ऐसे में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरि और महामंत्री हरिगिरि वासुदेवानंद से मिलने अब जोशीमठ जा रहे हैं। उधर, वासुदेवानंद सरस्वती के प्रवक्ता ओंकार नाथ त्रिपाठी का कहना है कि समझौते का प्रश्न ही नहीं उठता है। सिविल कोर्ट के फैसले के खिलाफ वह 10 दिन बाद हाईकोर्ट में अपील करेंगे। इस बारे में उन्हें स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती से निर्देश भी प्राप्त हो चुके हैं।
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