इलाहाबाद। नासिक सिंहस्थ कुंभ में महिला अखाड़े की मान्यता के सवाल पर अड़ी परी अखाड़े की पीठाधीश्वर त्रिकाल भवंता ने महंत ज्ञानदास और उनके सहयोगियों पर ध्वजारोहण के दौरान मंच पर अभद्रता और धक्कामुक्की का आरोप लगाते हुए उन पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि नासिक प्रशासन ने इस बारे में कोई पहल नहीं की तो शुक्रवार को उनकी ओर से ही महंत ज्ञानदास के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इतना ही नहीं इस मुद्दे को कई अन्य मंचों पर भी ले जाया जाएगा।
’अमर उजाला’ से बातचीत में त्रिकाल भवंता ने अपना पक्ष रखा। बोलीं, नासिक कुंभ में पुरोहित महासंघ के ध्वजारोहण कार्यक्रम में मुझे भी आमंत्रित किया गया था। ऐसे में जब मैंने अपनी बात कहने की कोशिश की तो महंत ज्ञानदास और उनके सहयोगियों ने हाथ पकड़कर माइक छीनने और मंच से धक्का देने की कोशिश की। यह महिला संतों का अपमान है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस हरकत के बाद मुझे यह भी आशंका है कि महंत ज्ञानदास मेरी हत्या न करवा दें। ऐसे में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करते हुए मुझे सुरक्षा दी जाए।
वहीं महंत ज्ञानदास के उत्तराधिकारी महंत संजय दास का कहना है कि महंत ज्ञानदास पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद, निराधार, निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण हैं। अपने को संन्यासियों से जोड़ने वाली त्रिकाल भवंता को कोई बात कहनी है तो वह संन्यासियों के सम्मुख त्र्यंबकेश्वर में जाकर कहें, उन्हें बताएं कि उन्होंने किससे दीक्षा ली है, नासिक के रामघाट पर तो शैव संतों का डेरा है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि अपने को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष कहने वाले महंत ज्ञानदास कुछ भी कह और करा सकते हैं। त्रिकाल भवंता के साथ हुई अभद्रता निंदनीय है। महंत ज्ञानदास आयोजक नहीं थे, ऐसे में उन्हें किसी भी प्रकार के विरोध का कोई अधिकार नहीं था। जहां तक परी अखाड़े को मान्यता देने की बात है तो त्रिकाल भवंता की यह मांग बेमानी है, इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।