हायक वन संरक्षक (एसीएफ)/क्षेत्रीय वन अधिकारी (आरएफओ)-2017 बैच के 33 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति फंसी हुई है, जबकि उनके बाद 2018 और 2019 बैच के चयनति अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है। अगर फाइलें लंबित पड़ी रहीं तो 2017 बैच के संबंधित चयनित अभ्यर्थी अन्य अभ्यर्थियों के मुकाबले जूनियर हो गए जाएंगे। अभ्यर्थियों ने शासन और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में फंसी फाइलों के शीघ्र निस्तारण की मांग की है।
एसीएफ/आरएफओ और पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा संयुक्त रूप से आयोजित की जा जाती है और प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद पीसीएस और एसीएफ/आरएफओ की मुख्य परीक्षाएं अलग-अलग आयोजित की जाती हैं। एसीएफ/आरएफओ-2017 की मुख्य परीक्षा वर्ष 2018 में 10 से 16 अक्तूबर तक आयोजित की गई थी। मुख्य परीक्षा का परिणाम सितंबर 2020 में जारी किया गया था और अंतिम चयन परिणाम 10 अक्तूबर 2020 को घोषित किया गया। इस परीक्षा के तहत आयोग ने 137 पदों का अंतिम चयन परिणाम जारी किया था। इनमें एसीएफ सामान्य चयन के 17 पद, आरएफओ सामान्य चयन के 48 और आरएफओ विशेष चयन/बैकलॉग के 72 पद शामिल थे।
अभ्यर्थियों का कहना है कि आरएफओ के 120 पदों पर चयनित अभ्यर्थियों में 87 अभ्यर्थियों का फिजिकल/मेडिकल करा दिया गया, लेकिन विभिन्न कारणों से 22 अभ्यर्थियों की फाइलें शासन स्तर पर और 11 अभ्यर्थियों की फाइलें आयोग में लंबित पड़ी हैं। फाइलें पेंडिंग होने के कारण 33 अभ्यर्थियों की समय से नियुक्ति पर संकट मंडरा रहा है। अगर देर हुई तो वह अन्य साथियों से जूनियर हो जाएंगे और भविष्य में उनके वेतन, प्रमोशन पर भी इसका असर पड़ेगा। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह ने आयोग के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री को ईमेल के माध्यम से पत्र भेजकर मांग की है कि चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए। अगर इन अभ्यर्थियों के मामले में जल्द ही कोई निर्णय नहीं होता है तो ट्विटर पर अभियान चलाया जाएगा और न्यायालय में चुनौती भी दी जाएगी।