लोकसेवक से ऐसी लापरवाही की उम्मीद नहीं की जा सकती
कोर्ट ने कहा कि एक लोक सेवक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि दस्तावेज का सत्यापन किए बगैर सेवा नियमित कर देगा। डीआईओएस सहित शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी की भी जवाबदेही है। चयन वेतनमान देने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही है। विभागीय जांच की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा सेवा नियमित करने से लेकर चयन वेतनमान देने तक की जांच होनी चाहिए।
याची ने कोर्ट के आदेश का अनुपालन न होने पर याचिका दायर की थी। नोटिस जारी होने केबाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने धारा 16 ई (10) के अंतर्गत कार्यवाही शुरू की। याची ने जवाब दिया कि उसकी नियुक्ति बीएससी कृषि डिग्री के आधार पर की गई थी। फर्जी डिग्री के आरोपों से इनकार किया। सुनवाई केदिन याची की पत्नी बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती थी। उसने निदेशक को इसकी सूचना दी। इसके बाद दोबारा बुलाए बगैर याची की सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया गया, जिसे चुनौती दी गई है।