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एपीओ, कृषि अधिकारी परीक्षा में आरक्षण का पेच

Thu, 04 Jun 2015 12:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित कृषि अधिकारी और सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) परीक्षाओं में आरक्षण का पेच फंस गया है। प्रतियोगी छात्र मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। दोनों मामलों में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर आयोग द्वारा लागू आरक्षण को चुनौती दी गई है। कृषि अधिकारी परीक्षा के परिणाम को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि विज्ञापन में घोषित सामान्य वर्ग की सीटों को घटाकर ओबीसी के पदों में अप्रत्याशित वृद्धि कर दी गई, जबकि एपीओ परीक्षा के लिए 29 अप्रैल 2015 को जारी विज्ञापन को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि ओबीसी कोटे की सीटें निर्धारित 27 प्रतिशत से कम आरक्षित की गई हैं। याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने आयोग और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
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एपीओ में ओबीसी का कोटा कम
आयोग द्वारा 29 अप्रैल 2015 को एपीओ के 372 पदों के विज्ञापन को भी चुनौती दी गई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि विज्ञापन में ओबीसी कोटे को 27 प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया गया है। विवेक यादव और अन्य की याचिका पर बहस करते हुए अधिवक्ता जमशेद अंसारी का कहना था कि विज्ञापन में सामान्य के लिए 229 पद, अनुसूचित जाति के लिए 55, पिछड़ा वर्ग के लिए 88 पद आरक्षित हैं। महिलाओं के  लिए 74 पद आरक्षित किए गए हैं। इसमें ओबीसी का कोटा 27 प्रतिशत नहीं होता है। याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति वीके शुक्ला और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने लोक सेवा आयोग और प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई होगी।

कृषि अधिकारी में ओबीसी को दिए 2030 पद
कृषि अधिकारी ग्रुप थ्री के लिए 22 अक्तूबर 2013 को जारी विज्ञापन के तहत 6628 पदों पर भर्ती के लिए लागू आरक्षण को लेकर उठे विवाद पर हाईकोर्ट चार जून को सुनवाई करेगा। एकल न्यायपीठ ने इस मामले को अब खंडपीठ के समक्ष भेज दिया है। बृहस्पतिवार को इस पर न्यायमूर्ति वीके शुक्ला और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ सुनवाई करेगी। मनीष उपाध्याय और 17 अन्य की याचिकाओं पर आज जस्टिस वीके बिरला की बेंच में सुनवाई हुई। अभ्यर्थियों का कहना है कि विज्ञापन में जनरल कोटे के लिए 3616 सीटें तथा ओबीसी के लिए 566 सीटें आरक्षित थीं। 15 सितंबर 2014 को घोषित परिणाम में ओबीसी कोटे में 2030 का चयन किया गया, जबकि सामान्य की सीटें कम 2221 कर दी गईं। आयोग का कहना है कि कुल पदों के सापेक्ष श्रेणीवार चयन किया गया है। कोर्ट ने इसी मामले में पूर्व में दाखिल याचिकाओं के इसे संबद्ध कर दिया है।
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