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अपराजिता अभियान: कुलपति बोले- भीड़ का हिस्सा न बनें, लक्ष्य को साधें और आगे बढ़ें

Fri, 01 Mar 2019 12:38 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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भीड़ का हिस्सा न बनें, केवल अपने लक्ष्य को साधें और आगे बढ़ें, सफलता जरूर मिलेगी। इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने गुरुवार को सीएमपी पीजी कॉलेज में ‘अमर उजाला’ के अपराजिता अभियान के तहत आयोजित व्याख्यान में छात्र-छात्राओं को यही सलाह दी। साथ ही उन्होंने करियर संबंधी कई महत्वपूर्ण टिप्स दिए। मुख्य वक्ता प्रो. राजेंद्र ने छात्रों को यह मशविरा भी दिया कि विचार करें, लेकिन किसी विचारधारा के पीछे न चलें। छात्र जीवन में जो वक्त मिलता है, वह सबसे बहुमूल्य होता है।

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पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित करें। हमेशा अपडेट रहें। अपनी योग्यता एवं क्षमता का आकलन खुद करें और उसी के अनुसार लक्ष्य निर्धारित करें। आज के समय मेें योग भी रोजगार का बड़ा साधन हो गया है। कहने का मतलब यह है कि जो भीड़ कुछ गिनीचुनी सरकारी नौकरी के पीछे भाग रही है, उस भीड़ का हिस्सा न बनें। रोजगार के रोज नए रूप सामने आ रहे हैं। विज्ञान की कई नई शाखाएं खुली हैं। साहित्य, संगीत और कला के क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़े हैं। जरूरत है कि खुद को अपनी क्षमता के अनुसार ढालें।

देश में बड़ी आबादी ऐसे युवाओं की है जो अकुशल है। सफलता के लिए शिक्षित, दीक्षित, परीक्षित और प्रशिक्षित होना जरूरी है। यही आपको कुशल बनाएगा और कॅरियर की ऊंचाई तक पहुंचने में मदद करेगा। अब नॉलेज भी एक प्रकार का उद्योग हो गया है। इससे पूर्व कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बृजेश कुमार और प्रॉक्टर डॉ. संतोष श्रीवास्तव ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया। प्राचार्य डॉ. बृजेश कुमार ने ‘अमर उजाला’ की इस पहल को सराहा और छात्र-छात्राओं से कहा कि प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने जो कहा, उस पर अमल भी करें, सफलता जरूर मिलेगी। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुनंदा दास ने किया। अंत में मुख्य वक्ता ने सभी को अपराजिता अभियान के तहत नारी सशक्तिकरण की शपथ दिलाई।
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शिक्षकों, अभिभावकों को भी समझनी होगी जिम्मेदारी
कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि शिक्षकों और अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। शिक्षा रोजगारपरक तभी होगी, जब इसका आधारभूत ढांचा मजबूत होगा। इस पर मंथन करना होगा कि हम जो पढ़ा रहे हैं और छात्र-छात्राओं को जो संसाधन उपलब्ध कर रहे हैं, वे किसी काम के हैं या नहीं। बहुत से कॉलेज में पीजी की पढ़ाई शुरू हो जाती है। शिक्षक भर्ती कर लिए जाते हैं लेकिन विभागों में लाईब्रेरी नहीं होती है। लाइब्रेरी है तो उसमें फटी-पुरानी किताबें मिलती हैं। पुरातन ज्ञान हमारे के लिए बहुत उपयोगी नहीं रह गया है।

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