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फर्जी मार्कशीट पर 11 वर्ष से नौकरी कर रहे प्राइमरी टीचर की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज 

Fri, 11 Jun 2021 09:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • हाईकोर्ट ने कहा, फर्जी मार्कशीट बनाने वाले शिक्षा पद्धति और सामाजिक ढांचे को पंगु कर रहे
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अदालत
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि फर्जी मार्कशीट बनाने वाले लोग न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे बल्कि सामाजिक ढांचे को भी पंगु कर रहे हैं। कोर्ट ने फर्जी मार्कशीट के आधार पर 11 वर्ष से प्राइमरी स्कूल में नौकरी कर रहे टीचर की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दिया। 

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अध्यापक पर आरोप है कि वह आगरा विश्वविद्यालय से बीएड की फर्जी मार्कशीट के आधार पर टीचर नियुक्त हुआ और वर्ष 2009 से पढ़ा रहा था। फर्जी मार्कशीट को लेकर इसके खिलाफ थाना अहमदगढ़, बुलंदशहर में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने का मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस मुकदमे में याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अग्रिम जमानत की मांग की थी। याची के वकील का कहना था कि इस मार्कशीट को पाने में उसका कोई दोष नहीं है। उसे नहीं मालूम था कि उसकी मार्कशीट फर्जी है।

जबकि अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध करते हुए अपर महाधिवक्ता विनोद कांत और वैभव आनंद का कहना था कि यूपी में बिचौलियों के मार्फत फर्जी मार्कशीट बनाने व देने का रैकेट चल रहा है। याची कई वर्षों तक फर्जी मार्कशीट का लाभ लेता रहा है। वह यह नहीं कह सकता कि उसे फर्जी मार्कशीट का ज्ञान नहीं था। याची शिक्षक सुनील कुमार की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज करते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल ने कहा कि याची कोर्ट में अपने को सरेंडर  करे और विवेचना में सहयोग करे। कोर्ट ने कहा कि फर्जी मार्कशीट बनाने वालों के रैकेट में बिचौलियों, मास्टरमाइंड व लाभार्थियों की लंबी चेन है। इसके जड़ों तक जाने के लिए जांच जरूरी है। ऐसे मामलों में जांच के लिए कस्टडी कभी-कभी जरूरी हो जाती है।

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