Answer summoned for calling fewer candidates in interview
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में उप्र लोक सेवा आयोग द्वारा विज्ञापित जूनियर इंजीनियर सिविल, एग्रीकल्चर और मेकेनिकल के 2674 पदों पर तीन गुना से कम (3710) अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बुलाए जाने पर लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि किन परिस्थितियों में विज्ञापन की शर्तों के बावजूद कम अभ्यर्थियों को बुलाया गया। अमित कुमार पांडेय व अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर सुनवाई कर रहे हैं। याचिका की अगली सुनवाई 29 जनवरी 2020 को होगी।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना है कि लोक सेवा आयोग ने 24 दिसंबर 2013 को जूनियर इंजीनियर सिविल, मेकेनिकल और एग्रीकल्चर के पदों का विज्ञापन जारी किया था। विज्ञापन में कहा गया था कि साक्षात्कार में कुल घोषित पदों के सापेक्ष तीन गुना अभ्यर्थियों को बुलाया जाएगा। लिखित परीक्षा के बाद 16 अक्तूबर 2019 को परिणाम जारी किया गया।
याची को साक्षात्कार में नहीं बुलाया गया। उसका कहना है कि आयोग ने साक्षात्कार में तीन गुना अभ्यर्थियों को बुलाने के नियम का पालन किया होता तो याची को भी बुलाया जा सकता था। 2927 पदों के सापेक्ष 8022 अभ्यर्थी साक्षात्कार में बुलाए जाने चाहिए थे, मगर आयोग ने सिर्फ 3710 को साक्षात्कार के लिए बुलाया। आयोग ने 490 मेकेनिकल जूनियर इंजीनियर के पदों के सापेक्ष 1313 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया। 3 गुना के हिसाब से उनको 1380 अभ्यर्थियों को बुलाना चाहिए था। इसी प्रकार से जूनियर इंजीनियर एग्रीकल्चर के 88 पदों के सापेक्ष 518 व्यक्तियों को साक्षात्कार में बुलाया गया, जो तीन गुना से बहुत ज्यादा है। इसी प्रकार से जूनियर इंजीनियर सिविल में भी कम अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। कोर्ट ने आयोग को इस मामले पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।