सतुआ बाबा के शिविर में बुधवार को कथा के दूसरे दिन वृंदावन से आए कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने लोगों को सेवा भाव से मनुष्य धर्म निभाने की सीख दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा से बड़ा कोई पुण्य और कर्तव्य नहीं है।
सतुआ बाबा के शिविर में बुधवार को कथा के दूसरे दिन वृंदावन से आए कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने लोगों को सेवा भाव से मनुष्य धर्म निभाने की सीख दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा से बड़ा कोई पुण्य और कर्तव्य नहीं है। हमें राम चरित्र को आत्मसात करना होगा तभी कल्याण होगा।
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कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीनारायण के श्रीराम-कृष्ण जैसे 24 अवतार हैं। प्रभु धरती पर मानव रूप लेकर आए और हर अवतार में मानवता और सेवा संग कर्तव्य की सीख दी। कर्म प्रधान है लेकिन सद्गुण भी जरूरी हैं। कथा के दौरान श्रोता भक्त भजनों की प्रस्तुति पर मगन होकर नाचते रहे।
अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि मनुष्य जन्म लेना ही पर्याप्त नहीं है। पराया दर्द अपनाकर और बांटकर खाने वाला ही मनुष्य है। मानवधर्म सेवा से पूर्ण होगा। इससे पहले सतुआ बाबा ने श्रोताओं से कहा कि गौरी गोपाल आश्रम के यह आचार्य सनातन की सेवा कर रहे हैं।