सोरांव में हुए जघन्य हत्याकांड की खबर इलाके में तेजी से फैली। नतीजा यह हुआ कि कुछ ही देर में वहां सैकड़ों लोग जमा हो गए। उधर पुलिस ने मर्चरी भेजवाने के लिए शव कब्जे में लेने की कोशिश की तो मृतकों के परिजनों के साथ ही ग्रामीण भी आक्रोशित हो उठे। जिसे देख पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा। इसके बाद आठ घंटे तक मानमनौव्वल चलती रही और तब जाकर शाम को शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे जा सके।
वारदात की खबर सुबह सवा नौ बजे के करीब मिली तो सबसे पहले चौकी प्रभारी मौके पर पहुंचे। तब तक आसपास के रहने वाले लोग घर के बाहर जमा हो चुके थे। मौके पर जाकर मुआयना करने के बाद पुलिसकर्मियों को पता लगा कि मामला एक साथ पांच हत्याओं का है तो उनके होश उड़ गए। सूचना पर आननफानन में एक-एक करके आईजी, एसएसपी समेत तमाम अफसर वहां पहुंच गए। उधर हर बीतते पल के साथ मौके पर भीड़ बढ़ती ही जा रही थी। जानकारी पर आसपास के गांवों ही नहीं बल्कि थाना क्षेत्रों से भी ग्रामीणों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। भीड़ बढ़ती देख मौके पर गंगापार के कई थानों की फोर्स बुला ली गई।
साथ ही आरएएफ को भी बुला लिया गया। तब तक सूचना पाकर मृतका कामिनी के भाई कार्तिकेय व मृतक सोनू की बहन व अन्य परिजन भी पहुंच गए थे। भीड़ बढ़ती ही जा रही थी ऐसे में पुलिस अफसरों ने शव मर्चरी भेजवाने की सोची। हालांकि जैसे ही पुलिस ने शव कब्जे में लेना चाहा, परिजनों ने विरोध कर दिया। उनका कहना था कि मृतक सोनू के परिवार मेें अब केवल उसका भाई मोनू ही बचा है। ऐसे में उसके और मृतका कामिनी के प्रतापगढ़ में रहने वाले पिता के आने पर ही शव उठाने दिया जाएगा। ग्रामीणाें ने भी परिजनों की बात का समर्थन किया जिसके बाद पुलिस बैकफुट पर आ गई। इसके बाद अफसरों ने मृतका के भाई समेत अन्य परिजनों को कई बार समझाया, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुए। इस तरह करीब आठ घंटे तक मान-मनौव्वल चलती रही। शाम पांच बजे के करीब जाकर परिजन माने और तब जाकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे जा सके।
गांववाले हुए आक्रोशित, समझाने दौड़ी पुलिस
पुलिस अफसर जांच पड़ताल के साथ ही मृतकों के घरवालों से बातचीत में जुटे थे। परिजन हत्यारों को पकड़ने की मांग कर रहे थे जबकि पुलिस अफसरोें का कहना था कि शव मर्चरी भेजवाने के बाद मामले की जांच तेजी से की जा सकेगी। इसी दौरान भीड़ में शामिल कुछ लोग आक्रोशित हो उठे। उन्होंने चीखते हुए कहा कि पुलिस जल्द से जल्द शव मर्चरी भेजवाकर केवल मामला टरकाना चाह रही है। यही नहीं उन्होंने हाईवे जाम करने की भी ललकार लगाई। जिस पर ग्रामीण आक्रोशित हो उठे। यह देख पुलिस अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। हालांकि वहां मौजूद कुछ गांव के वरिष्ठों ने तुरंत ग्रामीणों को न सिर्फ समझाया, बल्कि उन्हेें शांत भी कराया तब जाकर अफसरों की जान में जान आई। इसके बाद पुलिस लगातार ग्रामीणों को शांत और घटनास्थल से अपने घरोें की ओर जाने को कहती रही।
सांसद पहुंची, तो फिर बिलखने लगे परिजन
घटना की जानकारी पर सुबह से गांव में जनप्रतिनिधियों का आना-जाना लगा रहा। शाम करीब साढ़े तीन बजे सांसद केशरी देवी पटेल भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने जैसे ही परिजनों को ढांढस बंधाने की कोशिश की, वह बिलखने लगे। इस दौरान सांसद ने आश्वासन दिया कि मामले में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। वह खुद इस मामले में अफसरों से बात करेंगी। उन्होंने आईजी केपी सिंह से मांग की कि मामले का जल्द खुलासा किया जाए, साथ ही जिस किसी की भी संलिप्तितता पाई जाए, उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए। इस दौरान ग्रामीणों ने उनसे स्थानीय पुलिस की लापरवाही की भी शिकायत की। बताया कि स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता और कुछ पुलिसकर्मियोें की मिलीभगत के चलते क्षेत्र में नशीले पदार्थों की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। नशे की लत पूरी करने के लिए ही अराजक तत्व आपराधिक वारदातों को भी अंजाम देने से पीछे नहीं हटते। पूर्व में भी क्षेत्र में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। जिस पर सांसद ने कहा कि वह इस मामले में जिला पुलिस केे अफसरों से खुद बात करेंगी। इससे पहले पूर्व सांसद धर्मराज पटेल व अन्य जनप्रतिनिधि भी गांव पहुंचे।