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राष्ट्र को समर्पित आनंद भवन के गृहकर में छूट का मसौदा तैयार

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परिसर में व्यावसायिक गतिविधियां न होेने का लिया जाएगा शपथपत्र
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प्रयागराज। करीब पांच दशक पहले राष्ट्र को समर्पित आनंद भवन के गृहकर में छूट का मसौदा नगर निगम अफसरों ने तैयार कर लिया है। अब इंतजार जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि के अनुरोधपत्र का है। ट्रस्ट संबंधी दस्तावेज और जमा पर्चियों के आधार अफसरों की कमेटी इस मामले को सुलझाएगी। इससे पहले परिसर में व्यावसायिक गतिविधियां न होने का शपथपत्र ट्रस्ट के सक्षम अधिकारी से लिया जाएगा।
जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि के प्रशासनिक सचिव डॉ. एन बालाकृष्णन के आठ नवंबर 2019 को जारी पत्र के आधार पर नगर निगम अफसरों ने आनंद भवन से संबंधित पत्रावलियां खंगाली हैं। सर्वे में भवनों और खाली भूमि की गणना से इतर वहां पर संचालित गतिविधियां देखी गईं। तारामंडल का उपयोग विज्ञान शिक्षा तथा अन्य भवनों में प्रवेश शुल्क रखरखाव के लिए लिया जाना बताया गया।
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इंदिरा गांधी ने किया था राष्ट्र को समर्पित
एक अभिलेख के मुताबिक आनंद भवन को एक नवंबर 1970 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्र को समर्पित करते हुए रखरखाव के लिए जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि के अधीन किया था। तब से यही ट्रस्ट यहां की व्यवस्था का संचालन करता है। खास यह भी है कि आनंद भवन, स्वराज भवन, तारामंडल को आयकर की धारा 80 जी के तहत कर से छूट भी मिलती है। इसकी पुष्टि जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि के प्रशासक डॉ. रवि किरन भी करते हैं, उन्होंने कहा कि स्थितियां साफ और कागज दुरुस्त हैं। दिल्ली कार्यालय से जल्द ही कार्रवाई संबंधी पत्र यहां आ जाएगा।
इन तथ्यों के आधार पर नगर निगम चाहे तो गृहकर में छूट और बकाया 4.35 करोड़ की माफी पर निर्णय ले सकता है। नियमों के मुताबिक कमेटी के निर्णय पर नगर आयुक्त की सहमति जरूरी होगी। अफसर चाहेंगे तो नगर निगम सदन से भी इस संबंध में अनुमोदन लिया जा सकेगा। पत्र के आधार पर महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी भी कह चुकी हैं कि ट्रस्ट के कागज मिलेंगे तो कर छूट पर विचार किया जाएगा।
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ट्रस्ट की ओर से अभी नहीं दिए गए दस्तावेज
आनंद भवन को गृहकर से छूट संबंधी दस्तावेज अभी तक जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि की ओर से नगर निगम को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। बकाया और कर माफी का मामला इसी पर अटका है। इधर नगर निगम इस संबंध में अपनी औपचारिकताएं पूरी करने में लगा है। वह फिलहाल बकाया वसूली नोटिस पर ही अडिग है।
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