जमुना क्रिश्चियन कॉलेज के ठीक सामने एक संकरी गली में अभिनेता अमिताभ बच्चन का पुश्तैनी मकान हुआ करता था, जिसका वजूद अब करीब-करीब खत्म हो चुका है। अमिताभ की दादी के सुरसती देवी के नाम पर यहां चालीस साल तक स्कूल भी चला, लेकिन दो साल पहले वह भी बंद हो गया। जहां पुश्तैनी मकान था, वहां अब तीन अलग-अलग दो मंजिला मकान खड़े हैं। हालांकि, मोहल्लेवालों का कहना है कि अभी भी बाहर से लोग अमिताभ बच्चन का पुश्तैनी मकान देखने आते हैं।
अमिताभ के दादा बाबू प्रताप नारायण ने कटघर में एक मकान बनवाया था। जब प्रताप नारायण के हाथ से चक जीरो रोड का मकान चला गया, तब उन्होंने राजा बारा से 1927 में करीब 30 गुणे 60 वर्गफीट जमीन पट्टे पर ली और दो मंजिला मकान बनवाया। पत्नी सुरसती देवी के साथ यहां जब वह रहने आए तब हरिवंशराय बच्चन किशोरावस्था में थे। फिर इसी घर में रहकर हरिवंशराय ने मधुशाला एवं निशा निमंत्रण जैसी कालजयी रचनाएं रचीं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नौकरी लगने पर वह कटरा के एक मकान में चले गए। जब अमिताभ का जन्म हुआ तब दादी सुरसती देवी मां-बेटे को लेकर कटघर के इसी मकान में चली आई थीं।
यहीं पर एक माह तक उनकी देखभाल की। सुरसती देवी के निधन और हरिवंशराय बच्चन के दिल्ली चले जाने के बाद बच्चन परिवार का नाता इस पुश्तैनी मकान से टूट गया। हालांकि, 1984 के लोकसभा चुनाव के दौरान अमिताभ के प्रचार में हरिवंशराय बच्चन भी कटघर पहुंचे थे। बताया जाता है कि तभी इस पुश्तैनी मकान को उन्होंने भांजे रमेशचंद्र को दे दिया था। यहां कक्षा पांच तक सुरसती देवी मेमोरियल स्कूल चलता था, जो 2016 में बंद हो गया। इसके बाद यह घर रमेशचंद्र के लड़कों अशोक, किशोर, अनूप एवं शिप्पू के बीच बंट गया। अब बच्चन परिवार के इस पुश्तैनी मकान को तोड़कर उसकी जगह तीन अलग-अलग दो मंजिला मकान बनाए जा चुके हैं।
अमिताभ बच्चन के पुश्तैनी मोहल्ले कटघर के लोगों में थोड़ी नाराजगी है। गली के ठीक मुहाने पर रमेश गुप्ता का घर है। वहां रहने वालीं सावित्री 1984 के चुनावी माहौल को याद करते हुए बताती हैं कि उस समय कटघर तिराहे पर एक सभा हुई थी, जिसमें अमिताभ के साथ जया बच्चन भी आई हुई थीं। शादी होने के बाद उसी वक्त जया पहली बार इलाहाबाद आई थीं। बताया, अमिताभ के बोलने के बाद जया करीब पांच मिनट ही बोलीं, लेकिन उनके हिस्से सबसे ज्यादा तालियां आई थीं। उसमें जया ने इस मोहल्ले में अपना ससुराल होने की बात बोलते हुए लोगों से मुंह देखाई मांगी थी। बताया, उनकी अपील पर मोहल्ले के तमाम लोगों ने बैलेट पर वोट देने के साथ ग्यारह रुपये की मुंह दिखाई दी थी, लेकिन अमिताभ दोबारा आने का वायदा करके भी नहीं आए। उनका नेग आज तक बकाया है। हरिवंशराय बच्चन के अस्थि विसर्जन के समय अमिताभ इलाहाबाद आए तब पूरे मोहल्ले के लोग बेसब्री से इंतजार करते रहे, लेकिन वह नहीं आए।