अमरनाथ का शेष है एक वर्ष का कार्यकाल
अमरनाथ मई 2018 में अध्यक्ष चुने गए थे। वह इस पद के लिए लगातार दूसरी बार निर्वाचित हुए थे। इस तरह से दूसरे टर्म का कार्यकाल मई 2023 में खत्म हो रहा है लेकिन अब उनके निर्वाचन पर आपत्ति उठाई गई है।
विधानसभा चुनाव से पहले सपा में हुए शामिल
दूसरी बार अध्यक्ष निर्वाचित अमरनाथ मौर्य उस समय भाजपा में थे लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद के साथ अमरनाथ भी पाला बदलकर सपा में चले गए। विधानसभा चुनाव में सपा ने अमरनाथ को शहर पश्चिमी से उम्मीदवार भी बनाया था लेकिन अंतिम समय में टिकट ऋचा सिंह को दे दिया गया।
कार्यवाहक अध्यक्ष की होगी नियुक्ति
सहकारी समितियों के बोर्ड गठन के लिए बैंक का अलग चुनाव आयोग है। बोर्ड की बैठक में हुए निर्णय की रिपोर्ट आयोग को भी भेजी जाएगी। अमरनाथ के निर्वाचन को निरस्त किया जाता है तो नए सिरे से चुनाव का निर्णय आयोग लेगा। तब तक के लिए कार्यवाहक अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी।
आमतौर पर उपाध्यक्ष को ही कार्यभार दिया जाता रहा है। ऐसे में उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह को चार्ज मिल सकता है। इनके अलावा बोर्ड के किसी सदस्य को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। इतना ही नहीं बोर्ड की हर बैठक की अलग-अलग सदस्य भी अध्यक्षता कर सकते हैं।
‘निर्वाचन पर आपत्ति गलत है। नियमानुसार निर्वाचन के 45 दिन के भीतर इस पर आपत्ति जताई जा सकती है। अब चार वर्ष बाद इस तरह से आपत्ति उठाना और बैठक बुलाना समझ से परे हैं। बोर्ड की बैठक में निर्णय के आधार पर ही आगे कदम उठाए जाएंगे। बोर्ड निर्वाचन निरस्त करता है तो कोर्ट जाएंगे।’ -अमरनाथ मौर्य - अध्यक्ष