अमर उजाला संवाद में सवाल पूछती छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला।
कॅरिअर कोच ने कहा कि परीक्षा नंबरों के लिए नहीं, बल्कि यह जानने के लिए दें कि आपने क्या सीखा। विषय को समझें और जानने का प्रयास करें कि जीवन में इनका क्या उपयोग है। कहा कि आगे चलकर जब आप नीट, जेईई जैसी परीक्षाओं में शामिल होंगे, तब सफलता का यही मंत्र काम आएगा। उन्होंने छात्र-छात्राओं के कई सवालों के जवाब भी दिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ. विशाल नोबेल सिंह, संचालन वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. एसपी दास एवं धन्यवाद ज्ञापन शबनम क्षत्रिय ने किया।
अमर उजाला संवाद में सवाल पूछतीं छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला।
सपने देखने में न करें कंजूसी
अमित कुमार निरंजन ने एक एक्टिविटी के माध्यम से विद्यार्थियों को समझाया कि सपने देखने में कंजूसी न करें, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए सपने देखें। उन्होंने सभी को 20 सेकेंड के लिए आंखें बंद कर यह सोचने के लिए कहा कि भविष्य में जो बनना चाहते हैं, उसे महसूस करें। इसके बाद कुछ विद्यार्थियों को मंच के पास बुलाया। एक विद्यार्थी ने बताया कि वह संगीत के क्षेत्र में जाना चाहता है, लेकिन परिवार वालों का सपोर्ट नहीं है। आज उसने तय कर लिया कि वह लक्ष्य पाकर रहेगा।
एक छात्रा ने बताया कि डॉक्टर, इंजीनियरों की भीड़ से अलग हटकर यू ट्यूबर बनना चाहती है। एक छात्रा ने बताया कि वह मिलिट्री में डॉक्टर बनना चाहती है और आंखें बंद करने पर उसने महसूस किया कि वह डॉक्टर की यूनिफॉर्म में इलाज कर रही हैं। छात्रा शक्ति भारद्वाज ने बताया कि परिवार वाले डॉक्टर बनाना चाहते हैं, लेकिन वह आर्मी में जाना चाहती है और उसने यही सपना देखा है। छात्रा सान्या कुरैशी का सपना जज बनना है ताकि वह लोगों के साथ न्याय कर सके।
अमर उजाला संवाद में छात्राओं से बातचीत करते करियर काउंसरल अमित निरंजन।
- फोटो : अमर उजाला।
क्या न पढ़ें यह जानना ज्यादा जरूरी
अमित कुमार निरंजन ने विद्यार्थियों को बताया कि क्या पढ़ना है, यह जानने से ज्यादा जरूरी है कि क्या न पढ़ें। एक महीने में आप पांच दिन पढ़ें और 25 दिन यह जानने का प्रयास करें कि क्या नहीं पढ़ना है। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के लिए रोज छह घंटे काफी हैं। इसमें भी एक घंटे तक कुछ नया पढ़ें और बाकी पांच घंटों में उसका अभ्यास करें, जो आपने पढ़ा है।
सफलता के लिए नियमित अभ्यास जरूरी है। एक एक्टिविटी के माध्यम से उन्होंने बताया कि आप मन में काेई गाना सोच रहे हैं और उसी वक्त आपको संविधान के बारे में कुछ बोलना है तो दोनों काम एक साथ संभव नहीं हैं। इसी तरह सीखने और अभ्यास करने में फर्क है। दोनों के लिए अलग-अलग वक्त निकालें। हमेशा ध्यान रखें कि पढ़ने के लिए एकाग्रता और याद रखने के लिए अभ्यास जरूरी है।
नौ बार की असफलता के बाद मिली सफलता
कॅरिअर कोच ने अपने संघर्षों और सफलता के कहानी भी विद्यार्थियों से साझा की। आठ विषयों से परास्नातक और सात विषयों से नेट पास कर चुके अमित कुमार निरंजन ने बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें भी असफलता का सामना करना पड़ा। लगातार नौ बार असफल होने के बावजूद वह डटे रहे और एक बार सफलता मिली तो फिर कदम नहीं थमे।