कुलपति ने किया शुभारंभ
अनुमति मिलने के बाद समारोह की शुरुआत हुई। इससे पूर्व मुक्त विवि की कुलपति प्रो. सीमा सिंह और मुख्य अतिथि गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय, गांधीनगर के कुलपति प्रो. रमा शंकर दुबे ने दीप प्रज्ज्वल के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की।
इस दौरान स्कूली बच्चों को पुस्तकें और बैग वितरित किए गए। मुख्य अतिथि प्रो. दुबे ने मेधावियों को मेडल बांटे और कुलपति प्रो. सिंह ने शिक्षार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं। हालांकि कोविड के कारण लोगों की उपस्थिति बहुत ही सीमित थी।
शिक्षार्थियों को ऑनलाइन डिग्री प्रदान की गई। इस मौके पर डिजी लॉकर का उद्घाटन किया गया। इसमें डिग्रियों को ऑनलाइन अपलोड किया गया है। साथ ही डाक के माध्यम से भी शिक्षार्थियों को डिग्रियां प्रेषित की जा रही हैं। समारोह का संचालन प्रो. विनोद कुमार गुप्ता एवं डॉ. श्रुति ने संयुक्त रूप से यिका।
समय प्रतीक्षा नहीं करता, अपने परिश्रम से इसे अनुकूल बनाएं
कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता है। यह भी ध्यान रखें कि समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता। यह कदापि न सोचें कि समय अच्छा आएगा तो अपने आप सब कुछ ठीक हो जाएगा। आप वर्तमान समय को परिश्रम से अपने अनुकूल बनाएं, सफलता अवश्य मिलेगी। यह बात गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय, गांधीनगर के कुलपति प्रो. रमा शंकर दुबे ने उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के 16वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कही।
उन्होंने मेडल एवं उपाधि प्राप्त करने वाले शिक्षार्थियों से कहा कि आपकी दीक्षा तभी पूरी मानी जाएगी जब आप शिक्षा या ज्ञान का उपयोग करने के बाद विनम्र बनें। प्रो. दुबे ने नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत को एक सशक्त ज्ञान आधारित राष्ट्र एवं वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।
उन्होंने समाज के विकस में उच्च शिक्षण संस्थानों की सीधी भूमिका पर जोर दिया। कहा कि विश्वविद्यालय अपने आसपास स्थित जन समुदाय के सामाजिक, आर्थिक विकास में अपना सक्रिय योगदान दें। आज पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। हम सबका दायित्व बनता है कि इस अमृत महोत्सव के अवसर पर आजादी के दीवानों की संकल्पना के अनुरूप भारत को एक समुन्नत राष्ट्र बनाएं।
कुलपति प्रो. सीमा सिंह ने गिनाईं मुक्त विवि की उपलब्धियां
दीक्षांत समारोह में मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सीमा सिंह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय संपूर्ण प्रदेश में 1239 अध्ययन केंद्रों के माध्यम विभिन्न स्तर एवं प्रकृति के 136 समसामयिक, गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक शैक्षिक कार्यक्रमों को संचालित कर रहा है।
प्रमाणपत्र कार्यक्रमों की श्रृंखला में ‘डिजिटल लिटरेसी’ जैसे और दिव्यांगों के सशक्तिकरण को साकार रूप देते हुए आगामी सत्र से ‘ऑटिज्म’ (स्वालीनता) जैसे महत्वपूर्ण विषयों में प्रमाण पत्र कार्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। साथ ही ‘कर्मकांड’ एवं ‘ज्योतिष’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों में कौशल विकास के लिए प्रमाणपत्र कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान सत्र में विश्वविद्यालय में 31495 नव प्रवेशित शिक्षार्थी नामांकित हुए हैं।
आठ मेधावियों को दानदाता स्वर्णं पदक
स्वर्गीय सुशील प्रकाश गुप्ता स्मृति स्वर्ण पदक एमए शिक्षाशास्त्र की छात्रा प्रियंका सिंह, बाबू ओमप्रकाश गुप्त स्मृति स्वर्ण पदक बीएड की छात्रा आकांक्षा मौर्या, कैलाशपत नेवेटिया स्मृति स्वर्ण पदक एमबीए की छात्रा प्रीति कुमारी, स्वगीय अनिल मीना चक्रवर्ती स्मृति स्वर्ण पदक बीए की छात्रा आरती यादव एवं एमए राजनीति विज्ञान की छात्रा सरिता कुमारी, प्रो. एमपी दुबे पर्यावरण, गांधी चिंतन एवं शांति अध्ययन उत्कृष्टता स्वर्ण पदक बीए के छात्र आयुष त्रिवेदी, प्रो. एमपी दुबे दिव्यांग मेधा स्वर्णपदक एमए अंग्रेजी के छात्र अभिषेक कुमार और राष्ट्रकवि पंडित सोहन लाल द्विवेदी स्मृति स्वर्णपदक एमए हिंदी के छात्र आशीष आनंद को दिया गया।