15 फीसदी क्षमता का तैयार हो चुका है सोलर सेल
प्रो.रविंद्र धर के अनुसार 1999 में जर्मनी में आर्गेनिक लिक्विड सोलर सेल बनाने की दिशा में काम शुरू हुआ था। दो फीसदी क्षमता (सेल पर पड़ी सूर्य की कुल ऊर्जा को इलेक्ट्रिक एनर्जी में बदलने की क्षमता) का सोलर सेल बनाने में सफलता भी मिली थी, लेकिन इसके बाद काम रुक गया। अकार्बनिक तत्वों से बने सोलर सेल (सोलर पैनल) के विकल्प के तौर पर अब इस पर फिर से शोध शुरू हुआ है। प्रो.धर ने बताया कि उन्होंने 15 फीसदी क्षमता का प्रोटोटाइप आर्गेनिक सोलर सेल बनाने में सफलता पाई है। छह फीसदी क्षमता तक तो ट्रायल भी हो चुका है। उन्होंने बताया कि अभी लगाए जाने वाले इनऑर्गेनिक सोलर सेल की क्षमता भी 18 से 20 फीसदी ही है। इस लिहाज से लिक्विड सोलर सेल का अब इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह बहुत टिकाऊ नहीं है। इस पर भी रिसर्च जारी है। जल्द ही सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।
चादर की तरह भी किया जा सकेगा इस्तेमाल
प्रो.धर का कहना है कि प्रोटोटाइप आर्गेनिक सोलर सेल का इस्तेमाल पेंट के रूप में किया जा सकता है। इसे दीवारों पर पेंट कर दिया जाएगा और इसके सेल सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदल देंगे। इसके अलावा इसकी चादर भी तैयार की जा सकती है, जिसका इस्तेमाल छत एवं किसी भी मुड़े स्थान पर किया जा सकेगा।
25 फीसदी ही आएगी लागत
प्रोटोटाइप आर्गेनिक सोलर सेल की लागत भी बहुत कम होगी। प्रो.धर ने बताया कि अभी लगने वाले साेलर पैनल की तुलना में इसमें 25 फीसदी ही लागत आएगी।