संगमनगरी के अभिजीत घोषाल संगीत की दुनिया के बहुमुखी गायक, संगीतकार, गीतकार और प्रशिक्षक हैं। उन्होंने ‘सारेगामापा’ प्रतियोगिता में लगातार 11 बार जीत हासिल की और 12वीं बार विजयी होने के बाद स्वेच्छा से प्रतियोगिता छोड़ दी। ‘बांग्ला सारेगामापा’ में कुशल एंकर होने के साथ ही वे हिंदी ‘सारेगामापा’ की जूरी में भी रह चुके हैं।
अभिजीत ने बॉलीवुड फिल्म ‘लंदन ड्रीम्स’ का सुपरहिट गाना ‘जश्न है जीत का’ शंकर-एहसान-लॉय के लिए गाया है और अब तक कुल 17 भारतीय भाषाओं में अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। शिक्षा में भी अभिजीत ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वे अपने विद्यालय, कॉलेज और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के टॉपर रहे। स्टेट बैंक में छह साल प्रोबेशनरी ऑफिसर के रूप में सेवा देने के बाद उन्होंने संगीत के क्षेत्र में पूर्णतः समर्पित होने का निर्णय लिया।
मंगलवार को कर्नलगंज थाने के पास शांति चौधरी के निवास पर आकर उनसे मुलाकात की। अभिजीत का संगीत कॅरिअर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। उन्होंने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, चीन, दुबई, सिंगापुर, फ्रांस, कुवैत और तंजानिया सहित कई देशों में प्रस्तुति दी है।
सामाजिक कार्यों में भी हैं अभिजीत सक्रिय
पिछले 17 वर्षों से वे हर पांच-छह महीने में टाटा कैंसर हॉस्पिटल के गंभीर मरीजों के लिए प्रस्तुति देते रहे हैं। 2018 में वाराणसी केंद्रीय कारागार में 1750 से अधिक कैदियों के लिए दो घंटे से अधिक का विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत किया। वे आर्मी सैनिकों के लिए भी नियमित प्रस्तुति देते हैं।
भजनों के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। अभिजीत ने अपने कार्यक्रम ‘भजन प्रवाह’ के माध्यम से काशी विश्वनाथ मंदिर, अयोध्या राम मंदिर, मां वैष्णो देवी, इस्कॉन मुंबई, स्वामीनारायण और जैन मंदिर समेत श्री ऑरोबिंदो आश्रम, पांडिचेरी में 75 से अधिक प्रस्तुतियां दी हैं। वर्ष-2025 में उनके भजन ‘डमरू बजाए’ को क्लेफ म्यूजिक अवॉर्ड्स में बेस्ट डिवोशनल साॅन्ग का पुरस्कार मिला। अभिजीत घोषाल न केवल एक प्रतिभाशाली गायक हैं बल्कि संगीत के छात्र, निर्देशक और गीतकार भी हैं।