चीफ प्रॉक्टर ने बताया कि मनीष को निलंबित कर दिया गया है और अभिभावकों के साथ उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है। चीफ प्रॉक्टर के अनुसार मनीष को दूसरी बार निलंबित किया गया है। इससे पूर्व भी एक अन्य मामले में शोधार्थी को निलंबित किया जा चुका है, लेकिन लिखित रूप से माफी मांगने के बाद उसे बहाल कर दिया गया था।
वहीं, चीफ प्रॉक्टर ने छात्र नेता अजय यादव सम्राट और अतेंद्र सिंह के खिलाफ बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश एवं बार कौंसिल ऑफ इंडिया को लिखे पत्र में कहा है कि इविवि परिसर में 12 जुलाई को हुए बवाल के दौरान इन दोनों छात्र नेताओं के नेतृत्व में महिला शिक्षकों से अभद्रता, तोड़फोड़ और लूटपात की गई। दोनों ही इविवि से विधि स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं।
पत्र में लिखा गया है कि दोगों ने न केवल अपनी मातृ संस्था के विरुद्ध निंदनीय अचारण किया, बल्कि इनका व्यवहार छात्र और अधिवक्ता दोनों की सामाजिक छवि को हानि पहुंचाने वाला है। चीफ प्रॉक्टर ने बार कौंसिल से आग्रह किया गया है कि अगर दोनों बार कौंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हैं या पंजीकृत होने की प्रक्रिया में हैं तो उसे निलंबित रखा जाए। अनुशासनहीनता में संलिप्त पाए जाने पर विश्वविद्यालय द्वारा इनकी उपाधि निरस्त किए जाने का प्रावधान भी है।
छात्रों ने किया कार्रवाई का विरोध
इविवि परिसर में छात्र की मौत के बाद हुए आंदाेलन में शामिल छात्र नेताओं के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का छात्रों ने विरोध तेज कर दिया है। संयुक्त संघर्ष समिति ने छात्रों पर हुई कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि इविवि परिसर में 1094 दिनों से शांतिप्रिय तरीके से जारी आंदोलन में शामिल राजनीति विज्ञान के शोध छात्र मनीष कुमार काे निलंबित किया जाना बेहद शर्मनाक है। विश्वविद्यालय परिसर में लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना छात्रों का मौलिक अधिकार है, जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन छीन नहीं सकता। विरोध दर्ज कराने वालों में भानु, अनुराग, सुधीर, अमन आदि शामिल रहे।