इविवि प्रशासन और पुलिस अगर तीन दिन पहले ही चेत गई होती तो पीसीबी हॉस्टल में पूर्व छात्र रोहित शुक्ला की हत्या न होती। मामला हद से आगे जाने पर तीन दिन पहले इविवि के चीफ प्रॉक्टर ने एसएसपी को पत्र भेजकर हॉस्टल में रहने वाले कुछ अपराधियों के नाम बताए थे और कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस ने भी पत्र को गंभीरता से नहीं लिया और नतीजा सामने है।
चीफ प्रॉक्टर प्रो. आरएस दुबे एवं डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार ने पीसीबी हॉस्टल से मिली शिकायत के आधार पर 12 अप्रैल को एसएसपी को पत्र भेजकर बताया था कि हॉस्टल में आलोक चौबे, रोहित शुक्ला उर्फ बेटू, आकाश शुक्ला समेत कई अपराधी रह रहे हैं। इसी तरह ताराचंद में भी कई अज्ञात अपराधियों के रहने की सूचना मिली है। पत्र में कहा गया था कि इन हॉस्टलों में अपराधियों का आतंक है। एसएसपी से आग्रह किया गया था कि आपराधिक छवि के लोगों को हॉस्टल से बाहर निकालने के लए सक्षम अधिकारियों के नेतृत्व में पर्याप्त पुलिस उपलब्ध कराएं।
यह पत्र पीसीबी हॉस्टल के छात्र आदेश कुमार से मिली शिकायत का हवाला देते हुए लिखा गया था। सोमवार को घटना के बाद डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार एवं कार्यवाहक प्रॉक्टर डॉ. राकेश सिंह की ओर से डीएम-एसएसपी को फिर से पत्र लिखा गया और इसमें कहा गया है कि आदर्श कुमार त्रिपाठी ने पीसीबी हॉस्टल में रहने वाले अपराधियों की शिकायत की थी और उसी शिकायत के आधार पर पुलिस को अपराधियोें के नाम से अवगत कराया गया था। इविवि के चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे का कहना है कि पहले पत्र में आदेश नाम गलती से टाइप हो गया था। शिकायत करने वाला छात्र आदर्श कुमार त्रिपाठी था। गौरतलब है कि रोहित की हत्या की मुख्य आरोपी आदर्श ही है।
डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार ने डीएम ओर एसएसपी को पत्र में आशंका जताई है कि हॉस्टल तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए भविष्य में किसी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में पीसीबी हॉस्टल को अपराधियों से मुक्त कराए जाने और चार पहिया वाहनों में आने जाने वालों पर विशेष नजर रखे जाने की जरूरत है। डीएम एवं एसएसपी से आग्रह किया गया है कि हॉस्टल में अराजकतत्वों की आवाजाही पर सख्ती से लगाम लगाई जाए।
हॉस्टलों में अपराधियों के कब्जे को लेकर बार-बार जिला एवं पुलिस प्रशासन को पत्र लिखने के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन अब कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी में है। चीफ प्रॉक्टर एवं डीएसडब्ल्यू की ओर से कर्नलगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक को लिख गए पत्र में कहा गया है कि इविवि प्रशासन के पास अपनी पुलिस फोर्स नहीं है। ऐसे में हॉस्टलों को अपराधियों से मुक्त कराने के लिए एक ही उपाय है कि उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका के माध्यम से प्रार्थना प्रस्तुत की जाए।
प्रयागराज। यूजीसी की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन ने टिप्पणी की कि विश्वविद्यालय गुंडाराज को बढ़ावा दे रहा है। हालांकि, डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार और चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे का मानना है कि एंटी रैगिंग हेल्पलाइन की ओर से ई-मेल के माध्यम से भेजे गए पत्र में की गईं टिप्पणियां वास्तुस्थिति को ठीक से न समझने के कारण की गई प्रतीत होती हैं।
दरअसल, पिछले दिनों हिंदू हॉस्टल में स्नातक द्वितीय वर्ष के छात्रों ने कर्नलगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि हॉस्टल में रैगिंग के नाम पर उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। इस पर पुलिस ने इविवि प्रशासन को पत्र भेजकर अफसरों एवं प्रोफेसरों की टीम बनाकर मामले की जांच कराने को कहा था। 11 अप्रैल को डीएसडब्ल्यू एवं चीफ प्रॉक्टर की ओर से कर्नलगंज थाने को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि एंटी रैगिंग कमेटी में जिला प्रशासन के अधिकारी भी नामित किए जाते हैं, लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से कई बार आग्रह किए जाने के बावजूद प्रशासन का कोई प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित नहीं हुआ और इसी वजह से विश्वविद्यालय की कार्रवाई प्रभावित होती है।