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Allahabad University : एलुमिनाई मीट ‘फेमिलियर फेसेज फिएस्टा’ में एक बार ताजा हुईं फिर पुराने दिनों की यादें

Sun, 01 Mar 2026 04:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शनिवार को एलुमिनाई मीट ‘फेमिलियर फेसेज फिएस्टा’ में एक बार फिर पुराने दिनों की यादें ताजा हुईं। शनिवार को कार्यक्रम का शुभारंभ सीनेट परिसर स्थित प्रो. ईश्वर टोपे सभागार में हुआ।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आयोजित पुरा छात्र सम्मेलन में पुस्तक का विमोचन करते अतिथि। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शनिवार को एलुमिनाई मीट ‘फेमिलियर फेसेज फिएस्टा’ में एक बार फिर पुराने दिनों की यादें ताजा हुईं। शनिवार को कार्यक्रम का शुभारंभ सीनेट परिसर स्थित प्रो. ईश्वर टोपे सभागार में हुआ। पुराछात्रों का आह्वान करते हुए कुलपति संगीता श्रीवास्तव ने कहा, ‘आना जब समय मिले, जब न मिले तब भी आना, हर साल आना’। इस दौरान देश-दुनिया में फैले इविवि के पूर्व छात्रों ने उपस्थिति से परिसर को जीवंत कर दिया।

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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति विनीत सरन और इविवि की कार्य परिसर में चांसलर नॉमिनी डॉ. दीपाली पंत जोशी उपस्थित रहे।
विवि से अपने जुड़ाव को याद करते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि इविवि का यह प्रांगण सदैव से ही नवीन रचनाओं और क्रांतिकारी विचारों के सृजन का केंद्र रहा है। कुलपति ने कहा कि पुराछात्रों का विश्वविद्यालय से गहरा लगाव ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। इविवि ने पहली बार नैक से ए++ ग्रेडिंग प्राप्त की है। पांच वर्षों में 400 नए शिक्षकों की नियुक्ति, 190 कौशल-आधारित पाठ्यक्रम और बुनियादी ढांचे में व्यापक सुधार हुए हैं।

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सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और कला प्रदर्शनी

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण निराला आर्ट गैलरी रही, जहां कुलपति ने कला प्रदर्शनी और फूड गैलरी का उद्धाटन किया। यहां छात्रों की बनाई गई कलाकृतियों ने अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, डॉ. प्रज्ञा शर्मा और हिमांशु बाजपेई ने ‘झांसी की रानी’ की दास्तानगोई पेश कर समां बांध दिया। इस दौरान प्रो. जया कपूर के काव्य संग्रह का विमोचन भी किया गया। एसोसिएशन के सचिव प्रो. कुमार बीरेंद्र ने विवि के विकास में पुराछात्रों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।

बरगद लॉन में सजी कवि सम्मेलन की महफिल

शाम को बरगद लॉन में कवि सम्मेलन में पद्मश्री डॉ. अशोक चक्रधर, डॉ. सुनील जोगी और वसीम बरेलवी ने रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ. चक्रधर और डॉ. जोगी की हास्य-व्यंग्य कविताओं ने जहां सबको गुदगुदाया, वहीं वसीम बरेलवी की गजलों ने महफिल में चार चांद लगा दिए। इससे पहले डॉ. रवि सूर्यवंशी के निर्देशन में बनी लघु फिल्म के माध्यम से विवि में हुए बदलावों को प्रदर्शित किया गया। संचालन प्रो. जया कपूर, डॉ. सोनल शेकर और डॉ. ऋतंभरा मालवीय ने किया।
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