डॉ. विक्रम के मामले में इविवि प्रशासन को फिर मिला नोटिस
0 राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने एक सप्ताह के भीतर मांगा जवाब
0 जातिगत आधार पर अंक दिए जाने का आरोप लगाने से बढ़ा विवाद
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने इविवि प्रशासन को एक और नोटिस जारी किया है। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन से एक सप्ताह में जवाब मांगा है। अगर इस बार भी विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई जवाब नहीं दिया जाता है तो आयोग विश्वविद्यालय के अफसरों को व्यक्तिगत रूप से तलब कर सकता है।
डॉ. विक्रम ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में आरोप लगाए थे कि विश्वविद्यालय में जातिगत के आधार पर अंक दिए जाते हैं। यहां शिक्षक और छात्र जातिगत आधार पर बंटे हुए हैं। विवादित बयान वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने डॉ. विक्रम को नोटिस जारी कर प्रमाण सहित जवाब मांगा था और यह चेतावनी भी दी थी कि अगर प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इस नोटिस के खिलाफ डॉ. विक्रम ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद आयोग ने इविवि प्रशासन को नोटिस जारी कर 15 दिनों में जवाब मांगा था। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने आयोग को जवाब नहीं भेजा।
आयोग की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस दोबारा भेजा गया है और इस बार एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है। नोटिस में इस बात का भी जिक्र है कि डॉ. विक्रम ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है और विश्वविद्यालय प्रशासन को इसी मसले पर अपनी रिपोर्ट भेजनी है। डॉ. विक्रम का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को अगर उनके बयान से कोई दिक्कत है तो उनका मानसिक उत्पीड़न करने के बजाय कमेटी बनाकर जांच करा ली जाए। डॉ. विक्रम ने यह मांग भी है कि विश्वविद्यालय प्रशासन पिछले दस वर्षों का रिकार्ड सार्वजनिक कर दें। यह स्पष्ट हो जाएगा कि विश्वविद्यालय में अंक जातिगत आधार पर दिए जाते हैं या नहीं।