इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि)
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में जल्द ही स्थायी कुलपति की नियुक्ति हो सकती है। इविवि में भी चर्चाएं तेज हो गईं हैं कि किसी स्थायी शिक्षक को इस पद की जिम्मेदारी दी जाएगी या पूर्व की भांति किसी बाहरी को इविवि का कुलपति बनाया जाएगा। फिलहाल इंतजार खत्म होने वाला है। नए कुलपति की नियुक्ति होते ही तस्वीर साफ हो जाएगी।
पूर्व कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के इस्तीफे के बाद से विश्वविद्यालय कार्यावाहक कुलपति के भरोसे चल रहा है। इस दौरान तीन कार्यवाहक कुलपति ने कामकाम देखा। प्रो. हांगलू के इस्तीफे के बाद सबसे पहले प्रो. केएस मिश्र कार्यवाहक कुलपति बने। इसके बाद प्रो. पीके साहू एक दिन के कार्यवाहक कुलपति बनाए गए और अब प्रो. आरआर तिवारी यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। स्थायी कुलपति के न होने के कारण कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले अटके हुए हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण शिक्षक भर्ती है, जो स्थायी कुलपति के आए बगैर शुरू नहीं की जा सकती है। इविवि में पहले से ही शिक्षकों के आधे से अधिक पद खाली पड़े हैं और पिछले दस माह में कई अन्य शिक्षकों के रिटायर हो जाने से स्थिति और खराब हो गई है।
शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी को भी इसकी जानकारी है। नए सत्र में पठन-पाठन पटरी पर आ सके, इसके लिए नए शिक्षकों की नियुक्ति जरूरी हो गई है। लेकिन, स्थायी कुलपति के आने के बाद ही भर्ती प्रक्रिया शुरू हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि नए कुलपति के नाम पर जल्द ही मुहर लग सकती है। नए कुलपति की नियुक्ति के लिए 21 से 25 अगस्त तक इंटरव्यू आयोजित किए गए थे और पांच नामों को पैनल भी मंत्रालय को भेज दिया गया था। राष्ट्रपति यानी इविवि के विजिटर की अब अंतिम मुहर लगनी बाकी रह गई है। विजिटर जल्द ही इविवि के नए कुलपति के नाम पर अपनी मुहर लगा सकते हैं।