प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की प्रवेश परीक्षाओं में सामान्य और ओबीसी अभ्यर्थियों से एक समान आवेदन शुल्क लिए जाने के मामले को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने गंभीरता से लिया है। मामले में आयोग की तरफ से जवाब तलब किए जाने के बावजूद इविवि प्रशासन की ओर से कोई जवाब न दिए जाने पर आयोग ने इविवि प्रशासन को एक और पत्र जारी करते हुए चेतावनी दी है कि एक सप्ताह में जवाब नहीं मिला तो आयोग इविवि के अफसरों के खिलाफ समन जारी कर देगा। हालांकि इविवि के अफसरों का कहना है कि जवाब समय से भेज दिया गया है और बुधवार को आयोग को पत्र भेजकर इस बारे में अवगत करा दिया जाएगा।
इविवि के पूर्व छात्र राघवेंद्र यादव ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग में शिकायत की थी कि इविवि की प्रवेश परीक्षा में सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों से एक समान आवेदन शुल्क लिया जाता है। जबकि अन्य विश्वविद्यालयों में ओबीसी अभ्यर्थियों को आवेदन शुल्क में रियायत दी जाती है। इस पर आयोग ने इविवि प्रशासन से जवाब मांगा था। इविवि प्रशासन ने देश के कुछ प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों का हवाला देते हुए आयोग को जवाब भेजा था कि इन संस्थानों में भी सामान्य एवं ओबीसी अभ्यर्थियों से एक समान आवेदन शुल्क लिया जाता है। इस जवाब से शिकायतकर्ता के संतुष्ट न होने पर आयोग ने इविवि प्रशासन को एक और पत्र जारी किया और इस बार कहा कि मामले में उचित कार्यवाही करते हुए एक सप्ताह में एक्शन टेकन रिपोर्ट आयोग को भेजें।
आयोग ने 27 जुलाई को इविवि को तीसरा पत्र जारी करते हुए कहा कि इविवि प्रशासन की ओर से अब तक एक्शन टेकन रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। आयोग ने निर्देश दिए है कि पत्र प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट आयोग को भेज दी जाए। आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे समन जारी करने का अधिकार है। अगर रिपोर्ट नहीं भेजी गई तो आयोग समन जानी करते हुए इविवि के प्रतिनिधि को इस मामले में आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश भी दे सकता है। उधर, इविवि के पीआरओ डॉ. शैलेंद्र कुमार मिश्र का कहना है कि आयोग को एक्शन टेकन रिपोर्ट समय से भेजी जा चुकी है। ई-मेल और पंजीकृत डाक से रिपोर्ट भेजी गई है। इविवि प्रशासन के पास इसकी रसीद है। बुधवार को इस बारे में आयोग को पत्र लिखकर अवगत करा दिया जाएगा।