डॉ.विक्रम ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला देते हुए कहा है कि बौद्धिक अन्वेषण और आलोचनात्मक विश्लेषण अकादमिक गतिविधियों का आधार बनते हैं।
धार्मिक टिप्पणी के विवाद में फंसे मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.विक्रम ने इविवि प्रशासन की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब सौंप दिया है। उन्होंने कहा है कि जिस ट्वीट को लेकर विवाद हुआ है, वह उन्होंने सांविधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखकर किया था।
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डॉ.विक्रम ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला देते हुए कहा है कि बौद्धिक अन्वेषण और आलोचनात्मक विश्लेषण अकादमिक गतिविधियों का आधार बनते हैं। भगवान राम और भगवान कृष्ण पर उनके ट्वीट का उद्देश्य किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था, बल्कि तर्कसंगतता और अकादमिक प्रवचन के आधार पर विद्वानों के दृष्टिकोण से ऐतिहासिक घटनाओं का आलोचनात्मक विश्लेषण करना था।