कभी आईएएस, पीसीएस के लिए चयनित होते थे छात्र
इविवि में मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. योगेश्वर तिवारी भी मानते हैं कि पीसीएस मुख्य परीक्षा से वैकल्पिक विषयों को हटा दिए जाने से छात्रों का बीए के प्रति रुझान कम हुआ है। प्रो. तिवारी बताते हैं कि वर्ष 1921 से पहले आईसीएस की परीक्षा लंदन में हुआ करती थी। 1921 में पहली बार परीक्षा इलाहाबाद में हुई। 21 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जिसमें 11 अभ्यर्थी इविवि के छात्र थे और बाकी 10 अभ्यर्थी देश के अन्य हिस्सों से चयनित हुए थे।
प्रो. तिवारी का कहना है कि आजादी के बाद भी चयन की यही परंपरा कायम रही और यहां स्नातक में दाखिले सिर्फ आईएएस या पीसीएस में चयन के लिए होते थे। शिक्षक भी उच्च कोटि के थे। वर्तमान में भी इविवि को उच्च कोटि के कई शिक्षक मिले हैं, लेकिन अब पीसीएस परीक्षा में विषयों का कोई काम ही नहीं रह गया। ऐसे में केवल पीसीएस की तैयारी के लिए बीए में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थी अब यहां क्यों आएंगे।
इविवि के पूर्व डीन प्रो. एके श्रीवास्तव मानते हैं कि वर्तमान में बीए का स्कोप कम हुआ है। परंपरागत विषयों की मांग घट रही है। वर्तमान जरूरतों के हिसाब से नए-नए पाठ्यक्रम शुरू हो रहे हैं। इन सबके बीच पीसीएस से वैकल्पिक विषय हटाए जाने के बार बीए का थोड़ा-बहुत स्कोप भी कम होता जा रहा है।