एबीवीपी का दावा, निजी सुरक्षा एजेंसियों के साथ पुलिस को भी भुगतान
जनसूचना अधिकार के तहत मिली जानकारी के आधार पर साधा निशाना
प्रयागराज। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति की सुरक्षा एवं यात्रा पर हुए खर्च को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की सुरक्षा पर हुए कुल खर्च को लेकर भी एबीवीपी ने आपत्ति दर्ज कराई है।
जनसूचना अधिकार के तहत मिली जानकारी के आधार पर एबीवीपी के रोहित मिश्र, अतेंद्र सिंह, शिवम सिंह, रजनीश सिंह रिशु, निर्भय द्विवेदी और शिवम सिंह ने दावा किया है कि प्रो. हांगलू के कार्यकाल में इविवि की सुरक्षा में मनमाने तरीके से बेतहाशा वृद्धि करते हुए आठ करोड़ 40 लाख रुपये प्रतिवर्ष खर्च किए जा रहे हैं। निजी सुरक्षा एजेंसियों को इतना धन देने के बाद भी पुलिस प्रशासन को सुरक्षा के नाम पर अलग से एक लाख 22 हजार 814 रुपये का भुगतान किया गया।
सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में एबीवीपी ओर से आरोप लगाया गया कि कुलपति प्रो. हांगलू की ओर से वर्ष 2016 से 2018 तक की गई यात्रा पर दो लाख 58 हजार 140 रुपये खर्च किए गए जबकि पूर्व कुलपति द्वारा यह खर्च मात्र 17 हजार 592 रुपये है। कुलसचिव एनके शुक्ला द्वारा यात्रा भत्ता में तीन लाख 29 हजार 138 रुपये का भुगतान किया गया जबकि पूर्व में यह खर्च 2013-14 में 29903 रुपये, 2014-15 में 164889 रुपये और 2015-16 में 74898 रुपये रहा।
इसी तरह वित्त अधिकारी के रूप में प्रो. शुक्ला ने यात्रा भत्ता में 163299 रुपये खर्च किए। पूर्व वित्त अधिकारियों द्वारा वर्ष 2014-15 में 81333, 2015-16 में 30445 और 2016-17 में 29352 रुपये रहा। यह आरोप भी है कि कुलानुशाक की सुरक्षा में 245917 रुपये का अतिरिक्त भुगतान पुलिस प्रशासन को किया गया। कुलानुशासक प्रो. रामसेवक दुबे द्वारा चाय नाश्ते में कुल 82883 रुपये का व्यय किया गया जबकि पूर्व कुलानुशासन द्वारा यह खर्च महज 10 हजार रुपये रहा।
‘विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों को कई बार विश्वविद्यालय के कार्य से बाहर जाना पड़ता है। हर वर्ष केंद्र सरकार की संस्था कैग द्वारा विश्वविद्यालय के आय व्यय का गंभीरता से परीक्षण भी किया जाता है। कैग ने अपनी जांच में विश्वविद्यालय में कुछ भी अनियमित नहीं पाया। कुलपति, कुलसचिव एवं वित्त अधिकारी की सभी यात्राएं सामान्य वित्त नियम के अधीन हुई हैं। यात्राएं आधिकारिक हैं, व्यक्तिगत नहीं और सभी यात्रा व्यय कैग द्वारा अनुमोदित हैं। कुलपति ने यात्रा भत्ता में कभी भी दो लाख रुपये नहीं लिए। जहां तक सुरक्षा पर हुए खर्च की बात है तो देश के कई केंद्रीय विश्वविद्यालय अपनी सुरक्षा पर खर्च करते हैं। इसमें लगे पूर्व सैनिकों को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अनुसार ही भगतान किया जाता है।’ डॉ. चित्तरंजन कुमार सिंह, पीआरओ इलाहाबाद विश्वविद्यालय