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वर्तमान दौर में पत्रकारिता पर जिम्मेदारी बढ़ी

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Allahabad University - फोटो : CITY DESK
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इविवि के सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज में कथा लेखिका ममता कालिया ने छात्रों से संवाद किया
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प्रयागराज। देश की पत्रकारिता और हिन्दी साहित्य में अपने शहर का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। चांद और अभ्युदय जैसी पत्रिकाएं यहीं से निकलीं। आज भी इलाहाबाद से बहुत सारी उम्मीदें हैं और इलाहाबाद सृजनकर्ताओं को लगातार प्रेरणा देता रहता है। कथा लेखिका ममता कालिया ने यह बातें इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ मीडिया स्ट्डीज के विद्यार्थियों के साथ अपने संवाद के दौरान कहीं। छात्रों के साथ संवाद में श्रीमती कालिया ने कहा कि आज भारत की बातों को पूरी दुनिया में गंभीरता से लिया जा रहा है। सभी तरह की मंदी के बावजूद भारत विश्व राजनीति में तेजी से बढ़ रहा है। यही वजह है कि पत्रकारिता के उपर जिम्मेदारी बढ़ गई है।
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आज बालकृष्ण भट्ट की वह बात दोहरा लेना जरूरी है कि पत्रकारिता को पूंजी नहीं अभिव्यक्ति से मतलब होना चाहिए। डरा हुआ मीडिया, डरा हुआ समाज पैदा करता है। उन्होंने कहा सच बोलने की जिम्मेदारी शिक्षकों, पत्रकारों, साहित्यकारों और जननेताओं के पास है। दु:ख इस बात का है कि सबसे ज्यादा गिरावट अधिकांश जन नेताओं में देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद ने बहुत बड़े-बड़े पत्रकार और साहित्यकार देश को दिए हैं। आज भी यहां से जुड़ी हुई पत्रकारिता और सहित्य लोगों को आकर्षित करता है। नई पीढ़ी पर यह जिम्मेदारी है कि इस आकर्षण को बनाये रखें। सेंटर ऑफ मीडिया स्ट्डीज के कोर्स कोआर्डिनेटर डॉ. धनंजय चोपड़ा ने श्रीमती कालिया का परिचय देते हुए उनका स्वागत किया। डॉ. चोपड़ा ने कहा कि उनका रचना संसार विविधताओं से भरा हुआ है और वे अपने समय की सबसे महत्वपूर्ण कथा लेखिका हैं। संस्थान के अध्यापकगण एसके यादव, विद्यासागर मिश्र, सचिन मेहरोत्रा व अमित मौर्या आदि इस मौके पर मौजूद रहे।
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