फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इविविप प्रशासन ने प्रो. शास्त्री के खिलाफ फिर दी तहरीर

विज्ञापन
विज्ञापन
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित ने इविवि प्रशासन के खिलाफ दी तहरीर
विज्ञापन

दान में मिले करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप को लेकर बढ़ा विवाद
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रंजीत टोपा की ओर से दान में दिए गए करोड़ों रुपये के घोटाले को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है। घोटाले का आरोप लगाने वाले पूर्व ऑटा अध्यक्ष प्रो. राम किशोर शास्त्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए इविवि के रजिस्ट्रार ने कर्नलगंज थाने में तहरीर दी है। वहीं, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित कुमार मिश्र ने कुलपति एवं रजिस्ट्रार पर मिलीभगत कर घोटाला करने का आरोप लगाते हुए एसएसपी को प्रार्थना पत्र देकर इविवि प्रशासन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने और मामले की विधिक जांच कराने की मांग की है।
कुछ दिनों में प्रो. शास्त्री ने डीजीपी ओपी सिंह को मानद उपाधि दिए जाने पर आपत्ति की थी और इस मामले में रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए कर्नलगंज थाने में तहरीर दी थी। प्रो. शास्त्री ने शुक्रवार को दोबारा प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया कि कुलपति एवं रजिस्ट्रार ने दान में मिली रकम में से तकरीबन तीन करोड़ 84 लाख रुपये की अनियमितता की है। मामले में रजिस्ट्रार की ओर से दी गई तहरीर में कहा गया है कि प्रो. शास्त्री का आरोप निराधार है। प्रो. शास्त्री ने अराजक तत्वों को भड़काने के लिए यह बयान दिया है ताकि दीक्षांत समारोह में बाधा उत्पन्न की जा सके।
विज्ञापन

रजिस्ट्रार का कहना है कि दान में आई रकम विश्वविद्यालय के खाते में सुरक्षित है और इससे होने वाले निर्माण के लिए सीपीडब्ल्यूडी के पक्ष में वर्क ऑर्डर भी हो चुका है। रजिस्ट्रार ने तहरीर के माध्यम से कहा है कि प्रो. शास्त्री की गतिविधियों और इनके द्वारा दिए गए वक्तव्य की जांच कराकर उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाए। उधर, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित कुमार मिश्र ने एसएसपी को प्रार्थन पत्र देकर प्रो. शास्त्री के आरोपों को दोहराते हुए मांग की है कि मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट अंकित कराकर विधिक कार्रवाई की जाए।
इविवि में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बताया अपराध
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों ने प्रो. राम किशोर शास्त्री के खिलाफ इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से दी मुकदमा दर्ज कराने के लिए दी गई तहरीर का दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और इसकी निंदा की है।
विज्ञापन

प्रो. शास्त्री ने डीजीपी ओपी सिंह को डीलिट की मानद उपाधि दिए जाने पर आपत्ति की थी, जिसके बाद इविवि के रजिस्ट्रार ने प्रो. शास्त्री के खिलाफ थाने में तहरीर दे दी। इस मुद्दे पर सेवानिवृत्त शिक्षकों ने बैठक कर कहा कि विश्वविद्यालय के कुलसचिव का यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को एक संज्ञेज अपराध मानने जैसा है जो सर्वथा अनुचित है। विश्वविद्यालय परिसर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति एवं विचार विमर्श के केंद्र माने जाते हैं औरयह दुख का विषय है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इनके लिए कोई स्थान नहीं बचा है। विश्वविद्यालय परिसर को भय और आतंक का पर्याय बना दिया गया है और इस माहौल में उच्च कोटि के पठन-पाठन एवं शोध की कल्पना करना भी व्यर्थ है। बैठक में प्रो. अरुण कुमार श्रीवास्तव, प्रो. रमाचरण त्रिपाठी, प्रो. विनय चंद्र पांडेय, प्रो. रंजना कक्कड़, डॉ. हेमलता श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें