prayagraj news : इलाहाबाद विश्वविद्यालय।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में एकाउंट विभाग को शिक्षकों की ओर से लिए गए एडवांस का हिसाब नहीं मिल रहा है। ऐसे में इविवि प्रशासन ने तकरीबन 30 शिक्षकों को पत्र जारी करते हुए एडवांस में ली गई रकम का हिसाब मांगा है। इनमें इविवि के पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. आरआर तिवारी का नाम भी शामिल है, जिनसे वर्ष 2002 और 2003 में लिए गए एडवांस का हिसाब मांगा गया है। शिक्षकों को जारी पत्र में यह भी कहा गया है कि अगर वे हिसाब नहीं देते हैं तो एडवांस में ली गई रकम की रिकवरी की जाएगी।
हालांकि इतने पुराने मामलों में पत्र जारी किए जाने पर अब इविवि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय की एकाउंट बुक काफी समय से अपडेट नहीं की गई है। अब इसे अपडेट किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऑडिट के दौरान किसी तरह की आपत्ति न हो। ऐसे में पूर्व में शिक्षकों की ओर से विभिन्न मदों में लिए गए एडवांस का लेखा-जोखा भी खंगाला जा रहा है। जहां हिसाब नहीं मिल रहा है, वहां शिक्षकों को पत्र जारी कर कहा गया है कि एडवांस में ली गई रकम का ब्योरा एक सप्ताह में प्रस्तुत करें। अगर समायोजन के लिए बिल प्रस्तुत किए जा चुके हैं तो अभिलेखों की छायाप्रति के साथ विवरण उपलब्ध कराएं। यदि इस पत्र का जवाब नहीं दिया जाता है तो बिना किसी पूर्व सूचना के रिकवरी की जाएगी।
इविवि प्रशासन की ओर से इविवि के पूर्व कार्यवाहक कुलपति को जारी पत्र में बताया गया कि उन्होंने वर्ष 2002 और 2003 में नौ प्रकार के मदों के लिए एडवांस में ली गई रकम का हिसाब नहीं दिया है। इनमें कंप्यूटर टेस्ट, डाटा इंट्री, कंप्यूटर रिपेयर, मेंटेनेंस, वेबसाइट के रिन्वूयल जैसे मद शामिल हैं। इस बारे में प्रो. आरआर तिवारी का कहना है कि वह जल्द ही नोटिस का जवाब देंगे। वहीं, इविवि की पीआरओ डॉ. जया कपूर ने मामले में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। इन सबके बीच सवाल उठ रहे हैं कि इविवि प्रशासन अब तक क्या कर रहा था? एडवांस में ली गई रकम का प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत तक समाधान हो जाना चाहिए। विश्वविद्यालय को वर्ष 2005 में केंद्रीय दर्जा मिला, क्या उस वक्त एकाउंट रिकंसाइल नहीं हुआ? अगर हुआ तो इससे पहले का हिसाब क्यों मांगा जा रहा है?