छात्रसंघ के समानांतर एक अन्य संगठन फोरम फॉर कैंपस डेमोक्रेसी के बैनर तले भी छात्रों का आंदोलन जारी रहा। आत्मदाह करने वाले छात्र जाबिर पर से मुकदमा वापस लेने, रजिस्ट्रार, चीफ प्रॉक्टर और डीएसडब्ल्यू को हटाए जाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर छात्रों ने सोमवार को काला दिवस मनाया तथा परिसर में जुलूस निकाला। उन्होंने कुलपति दफ़्तर पर प्रदर्शन किया। कार्यवाहक कुलपति की ओर से वीसी से वार्ता कराने के आश्वासन के बाद छात्र वापस हुए।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार छात्र परिसर में एकत्रित हुए। वे काली पट्टी बांधे हुए थे। जुलूस बनाकर वे कुलपति दफ्तर पर पहुंचे। दिनेश चौधरी, रितेश विद्यार्थी, नीशू आदि छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन कुछ अराजकतत्वों के साथ मिलकर परिसर में लोकतंत्र की हत्या करने पर तुला है। कार्यवाहक कुलपति ने आंदोलनकारी छात्रों को बताया कि उनकी चार मांगें मान ली गईं हैं। उन्होंने अन्य मांगों पर चर्चा के लिए कुलपति से वार्ता कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद छात्र कुलपति दफ्तर से चले गए, लेकिन चेतावनी दी कि यदि दो दिन में कुलपति से वार्ता नहीं कराई गई तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। आंदोलन में सुभाष, रामचंद्र, विवेक, विकास, भीम, अंजलि, नीशू, प्रतिभा, साक्षी, रश्मि, सुनील, मदन, प्रभा, आशुतोष, दीपक, पवन, राजू आदि शामिल रहे।
छात्रों के दबाव के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कदम पीछे खींचते हुए उनकी चारों मांगें मान लीं। लेकिन अब छात्रों ने कुलपति को हटाने की मांग को लेकर बेमियादी अनशन शुरू कर दिया है। इससे एक बार फिर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन भी पूरे आंदोलन के राजनीतिकरण होने तथा अराजकता को लेकर आशंकित है। इस बाबत विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जिला प्रशासन के साथ निर्वाचन आयोग को भी रिपोर्ट भेजे जाने की तैयारी की गई है। रिपोर्ट तैयार भी कर ली गई है।
सभी मांगें मंजूर किए जाने के बाद अब छात्रों के आंदोलन से अध्यापक और अफसर हैरान हैं। इसके पीछे वे निहितार्थ भी तलाश रहे हैं। पूर्व के आंदोलनों को कुलपति से नाराज अध्यापकों का समर्थन मिला था। इतना ही नहीं आंदोलनों ने सियासी रूप भी धारण कर लिया था। इसके बाद मामला संसद में भी उठा। अध्यापकों और भाजपा नेताओं की शिकायत के बाद राष्ट्रपति ने कुलपति से जवाब भी मांगा है।
इसके मद्देनजर अध्यापकों और अफसरों की आशंकाओं को और बल मिल रहा है। साथ में आशंका जताई जा रही है कि चुनावी माहौल में छात्रों का बेमियादी अनशन कानून व्यवस्था के लिहाज से भी समस्या खड़ा कर सकता है। इसके मद्देनजर परिसर में फोर्स तैनात कर दी गई है। साथ में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भी निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
आंदोलन के दौरान आत्मदाह करने वाले छात्र पर से मुकदमा वापस लेने समेत अन्य मांगों को लेकर छात्र स्वतंत्रता संघर्ष के बैनर तले छात्रों ने सोमवार को सीएमपी डिग्री कालेज में कुलपति का पुतला दहन किया। पुतला दहन करने वालों में सवील अहमद, रवि कुमार, सौरभ पांडेय, मो.मोनिश, शेखर यादव आदि शामिल रहे।