नैनी को झूंसी से जोड़ने के लिए संगम से ऊपर से प्रस्तावित 987 करोड़ रुपये की लागत वाले फोरलेन एलीवेटेड पुल के लिए प्रदेश सरकार ने आधी से ज्यादा रकम स्वीकृत कर दी है लेकिन पुल का निर्माण कब से शुरू होगा, इसे लेकर अभी असमंजस की स्थिति है। हालांकि जल निगम की इकाई कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) ने माघ मेला के बाद काम शुरू होने की उम्मीद जताई है। नगर विकास मंत्री आजम खां की इच्छा है कि पुल का शिलान्यास और उद्घाटन वही करें लेकिन निर्माण शुरू होने में देरी और इस बीच चुनाव में अगर सत्ता परिवर्तन हुआ तो आजम की यह आस धरी रह जाएगी।
प्रदेश सरकार ने संगम पर एलीवेटेड पुल बनाने की घोषणा वर्ष 2013 के महाकुंभ के दौरान की थी। इसके बाद सीएंडडीएस ने इसकी डिजाइन तैयार कराई। संगम पर गंगा के ऊपर पुल की लंबाई 1445 मीटर होगी। इसके साथ नैनी में अरैल की ओर नए यमुना पुल से महेश योगी आश्रम तक 3250 मीटर सड़क चार लेन की बनाई जाएगी। इसके लिए अरैल बांध को चौड़ा किया जाएगा। झूंसी में यह पुल हवेलिया स्थित नवाब शरीफ की मजार के पास खत्म होगा। यहां से उल्टा किला होकर शास्त्रीपुल तक 1650 मीटर का फ्लाईओवर बनाया जाएगा, जिस पर 10 लिफ्ट लगेंगी। माघ, अर्द्धकुंभ और महाकुंभ के दौरान बुजुर्ग और महिला स्नानार्थी इन लिफ्टों के जरिए सीधे संगम के पास उतरकर स्नान कर सकेंगे।
सरकार ने पिछले वर्ष पुल के लिए पहले चरण में 300 करोड़ रुपये स्वीकृत किए।
इसके बाद 25 करोड़ रुपये मंजूर किए। वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए जारी बजट में प्रदेश सरकार ने पुल के लिए 250 करोड़ रुपये की और स्वीकृति दे दी। इस तरह पुल के लिए 575 करोड़ रुपये यानी आधी से ज्यादा रकम स्वीकृत हो चुकी है। सरकार ने पुल निर्माण की जिम्मेदारी भी राइट्स कंपनी को सौंप दी है लेकिन मौके पर अब तक काम न शुरू होने के कारण तरह-तरह के सवाल भी उठने लगे हैं, क्योंकि अगले कुछ माह में काम शुरू भी हुआ तो पुल को तैयार होने में दो से ढाई वर्ष का समय लगेगा। इस बीच विधानसभा चुनाव में सपा फिर से सत्ता में आई तो ही आजम खां की मुराद पूरी हो सकेगी।