भारतीय संस्कृति के जितने भी प्रतीक हैं उनकी रक्षा और प्रोत्साहन आवश्यक है। ग्रेगेरियन कैलेंडर के अनुसार मनाए जाने वाले राष्ट्रीय पर्वों को भारतीय पंचांग के अनुसार मनाया जाना चाहिए जैसे तिथि के मुताबिक माघ मेला मनाया जाता है। सोमवार को माघ मेला क्षेत्र में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारी शिष्य एवं गंगा सेवा अभियानम के संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, जिस दिन देश गणतंत्र हुआ विक्रम संवत 2006 के माघ मास, शुक्ल पक्ष की अष्टमी थी। हम स्वतंत्र हैं और हमारी तिथि गणना अधिक वैज्ञानिक है। संगम की रेती से पर्व पर गणतंत्र तिथि मनाने की पहल की गई है। सतुआबाबा संतोषदास ने कहा, यह पहल देश के लिए मिसाल बनेगी।
इससे पहले वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगा और तिरंगा का पूजन किया गया। वेद मंत्रों और शंखनाद के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ध्वजारोहण किया। संतों, महंतों और वेद पाठी बटुकों ने राष्ट्र गान और गंगा गान गाया।
इस दौरान सिपाही रमेश चंद्र मिश्र को गौ रक्षा और डा.रंजन शर्मा को वेदपाठी बटुकों को एनसीसी की ट्रेनिंग देने के लिए अभियानम की ओर से11हजार नकद और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में स्वामी विद्याचैतन्य, शंकर स्वरूप ब्रह्मचारी, आचार्य कुशमुनि, शिवप्रियानंद ब्रह्मचारी अनुराग तिवारी, विकास दुबे, राजेंद्र मिश्रा सहित आदि मौजूद थे।