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यूपी में शास्त्रीय संगीत को नहीं मिल रहा महत्व

Mon, 15 Feb 2016 11:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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 उत्तर प्रदेश और बिहार में शास्त्रीय संगीत को महत्व नहीं मिल रहा है। इन प्रदेशों में शास्त्रीय संगीत की विधा को बढ़ावा देने के लिए कोई काम नहीं हो रहा है। प्रदेश में कहीं कोई आयोजन, महोत्सव होता है तो उसमें सिने हस्तियों को तो बुलाया जाता है लेकिन शास्त्रीय संगीत के कलाकारों को नहीं। जबकि महाराष्ट्र, बंगाल और गुजरात में शास्त्रीय संगीत के विकास की दिशा में काफी काम हो रहा है। जब शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा ही नहीं दिया जाएगा तो लोगों के दिलों में इसके प्रति रुचि कैसे जगेगी। यह बातें सोमवार को पद्मभूषण पं. राजन मिश्र- पं. साजन मिश्र ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में कहीं। वह एक कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति देने के लिए शहर में मौजूद थे।
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पं. राजन मिश्र, पं. साजन मिश्र ने कहा कि युवाओं को शास्त्रीय संगीत से जोड़ने के लिए जरूरी है कि इस विधा के विकास के लिए काम किए जाए। शास्त्रीय संगीत के प्रति लोगों लोगों के मन में नकारात्मकता है। सब यहीं सोचते हैं कि शास्त्रीय संगीत क्लिष्ट है। इस पूर्व धारणा को दूर कर करना होगा। शास्त्रीय संगीत में जो सुकून और सकारात्मकता है वह किसी और संगीत में नहीं। तभी तो आजकल ऊल जलूल शब्दों के साथ जो गाने बन रहे हैं वह सिनेहाघरों से बाहर निकलते ही सब भूल जाते हैं। जबकि पुराने गीत आज भी लोगों की जुबान में है। ‘मन तड़पत हरि दर्शन को आज’, ‘मोहे पनघट पर नंदलाल छेड़ गयो रे’, ‘पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई’ जैसे गीत आज भी सुकून देते हैं क्योंकि ये शास्त्रीय संगीत पर बने थे।

उन्होंने संगीत में टेकभनोलाजी के प्रयोग पर कहा कि यह अच्छा है। इसके जरिए संगीत के घराने अब बंदिश में नहीं बंधे है। टेक्नोलाजी के जरिए सभी घरानों की समझ एक साथ हो रही है। इस पिछले दिनों देश में असहिष्णुता के नाम पर पुरस्कार वापस किए गए जाने के मामले में उन्होंने कहा कि पुरस्कार पहचान और सम्मान दिलाता है। इसेे वापस करना राष्ट्रीय अपमान है।
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 अलंकार पं. बडे़ रामदास जी संगीत अकादमी की ओर से आयोजित पं. गणेश प्रसाद मिश्र स्मृति समारोह-2016 में पद्मभूषण पं. राजन मिश्र-पं. साजन मिश्र ने अपने गायकी से श्रोताओं के दिलों को छू लिया। राग नंद से उन्होंने गायन की शुरुआत की। इसके बाद एक से बढ़कर गीतों और भजनों पर बजने वाली तालियों से प्रयाग संगीत समिति का ऑडिटोरियम गूंजता रहा।
इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत न्यायमूर्ति करुणानंद बाजपेई और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के प्रो. पं. विद्याधर मिश्र ने दीप जलाकर की। इविवि के पूर्व कुलपति प्रो. राजन हर्षे ने मिश्र बंधुओं का सम्मान किया। तबले पर राजेश मिश्र और हारमोनियम पर कामता प्रसाद मिश्र ने संगत दी। कार्यक्रम संयोजक शास्त्रीय संगीत गायक ऋषि मिश्र और वरुण मिश्र रहे। संचालन अवनीश त्रिपाठी ने किया।
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