प्याज की कीमत अब लोगों के आंसू निकालने लगी है तो दाल भी पतली हो गई है। नतीजा है कि भोजन की थाली से दोनों ही चीजें गायब होेने लगी हैं। प्याज का भाव खुदरा बाजार में 80 रुपये प्रतिकिलो के पार पहुंच गया है तो अरहर दाल की कीमत सैकड़ा पार करने के बाद प्रतिकिलो 140 रुपये तक पहुंच गई है। प्याज और अरहर दाल की आवक कम होने के कारण अगले कुछ समय में कीमत कम होने की भी संभावना नहीं है। इनकी कीमतें बढ़ने से जमाखोरों की चांदी हो गई है लेकिन जिला प्रशासन और मंडी परिषद कीमत पर नियंत्रण लगाने में नाकाम है।
अगस्त के शुरूआत में खुदरा बाजार में प्याज की 40-45 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच गई थी, उस दौरान मंडी सचिव एवं मुंडेरा मंडी के आढ़ती के बीच बैठक में निर्णय हुआ था कि खुदरा बाजार में कीमत प्रतिकिलो 50 रुपये के पार जाने पर आढ़तियों की ओर से मोबाइल स्टॉल लगाकर सस्ती प्याज उपलब्ध कराई जाएगी लेकिन स्टॉल तो दूर अब मुंडेरा मंडी में ही प्याज का थोक भाव 55-65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इलाहाबाद में अगस्त के शुरूआत तक प्याज मध्य प्रदेश के सतना और मैहर से आ रहा था। उस दौरान मंडी में कीमत 18-20 प्रति किलो थी।
आमतौर पर जुलाई-अगस्त तक नासिक (महाराष्ट्र) से प्याज की आवक शुरू हो जाती है लेकिन इस बार वहां जमाखोरी के कारण प्याज का भाव आसमान छू रहा है।
नासिक और सतना-मैहर से प्याज की आवक तकरीबन बंद होने के बाद अब यहां कर्नाटक से 5000-6000 क्विंटल के भाव यहां आ रही है। नतीजा है कि मुंडेरा थोक मंडी में प्याज 55-65 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रहा है। इसका सीधा असर खुदरा बाजार में दिख रहा है। उधर, प्रदेश में अरहर दाल का उत्पादन कम होने का असर बाजार पर पड़ रहा है। यूपी में इस बार दाल की पैदावार बेहद कम रही है। यहां महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से अरहर दाल आ रही है। वहां से भी आवक कम होने के कारण थोक बाजार में अरहर दाल 13500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। इसी वजह से खुदरा बाजार में अरहर दाल की कीमत प्रतिकिलो 140 रुपये तक पहुंच गई है। दाल के थोक कारोबारी सतीश केसरवानी का कहना है कि यूपी में फसल कम होने के कारण ऐसा हो रहा है। कहा कि अभी कुछ और समय तक दाल की कीमत में कमी की संभावना नहीं है।