माघ मेले का चौथा स्नानपर्व वसंत पंचमी शनिवार को है। हर हर- गंगे के जयघोष के साथ विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना की तैयारियां शुक्रवार को मेला क्षेत्र होती रही। संतों के शिविरों में गुरु मंत्र लेने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंच गई है। देर रात तक आस्था के रंग में रंगे श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है।वसंत पंचमी स्नान पर्व के उल्लास में संगम की रेती पर बसी तंबुओं की नगरी ने वसंती रंग ले लिया है। पीत पताका संतों के शिविरों में लहरा रही है। पीले वस्त्र धारण किए कल्पवासी गुरु पूजा की तैयारियों में व्यस्त है। विद्या की देवी सरस्वती पूजन अर्चन की तैयारियां संतों के शिविरों में जोरों पर हैं। देवी की आराधना के लिए पीला आसन से लेकर पीले रंग का भोग बनाने की तैयारियों में संत अपने भक्तों के साथ व्यस्त हैं।
पंचमी तिथि का संचरण शुक्रवार को दोपहर 12:47 से शनिवार की सुबह 10:24 बजे तक है। उसके बाद षष्टी तिथि आरंभ हो जाएगी। अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद के महामंत्री आचार्य अविनाश राय के मुताबिक शनिवार का दिन रेवती और अश्विनी नक्षत्र का संयोग होने से शुभ योग बना है। पंचमी का पुण्यकाल पूरे दिन रहेगा।
संतों के शिविरों में सरस्वती पूजन की तैयारी देर रात तक चलती रहीं। त्रिवेणी मार्ग स्थित ज्योतिष्पीठ एवं द्वारकाशारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, पुरीपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी नरेंद्रानंद, स्वामी अधोक्षजानंद, स्वामी विद्याचैतन्य, अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति के अध्यक्ष विमलदेव आश्रम, महामंत्री ब्रह्माश्रम के शिविरों में सरस्वती पूजा एवं यज्ञोपवीत संस्कार होंगे।
वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती का पूजन के बजाए सुहागिनें गौरी पूजा करेंगी। अखंड सौभाग्य के लिए विधिविधान से गौरी पूजन की तैयारी शुक्रवार की गई। सुहाग सामग्री खरीदी गई। सुबह देवी के मंदिरों में सोलह शृंगार कर गौरी पूजा करेंगी।