सीवर लाइन बिछाने के लिए खोदी जा रही सड़क शहरियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। खोदाई में निकली मिट्टी सड़क पर जहां-तहां पड़ी है और उससे उड़ती धूल उनकी सेहत के लिए खतरा बन गई है। धूल, लोगों के फेफड़ों में भरने लगी है। इससे सांस लेने में दिक्कत के साथ लोगों की आंख पर भी असर पड़ रहा है। एलर्जिक समस्याएं बढ़ने के साथ अस्पतालों के टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
सेहत के साथ यह धूल वाहनों के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो रही है। इन दिनों गाड़ियों के वर्कशॉप में एसी ब्लोअर और एयर फिल्टर चोक की समस्या वाली चार पहिया गाड़ियां काफी संख्या में पहुंच रही हैं। यह समस्या कई दिन या महीनों की नहीं बल्कि अगले दो वर्षों तक रहेगी क्योंकि सीवर लाइन बिछाने का काम वर्ष 2018 में पूरा होना है।
शहर के पॉश इलाके सिविल लाइंस से लेकर घनी आबादी वाले मुट्ठीगंज क्षेत्र, अल्लापुर से लेकर सलोरी, गोविंदपुर, शिवकुटी आदि इलाकों में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की ओर से सीवर लाइन बिछवाई जा रही है। काम में लगी कंपनी ने सीवर लाइन बिछाने का काम पेटी कॉन्ट्रेक्टरों को दे दिया, उनमें से ज्यादातर अनुभवहीन तो हैं हीं, उनके काम करने का बल्कि उनका तरीका भी अव्यवस्थित है। जिन सड़कों पर सीवर लाइन बिछाने के लिए जेसीबी से खोदाई की जा रही है, वहां बड़ी मात्रा में मिट्टी फैली है।
इस बीच उधर से चारपहिया वाहन के गुजरते ही जबरदस्त धूल उड़ती है। इसकी वजह से पीछे और बगल से आने वाले वाहन चालकों का चेहरा धूलधूसरित हो जाता है। ज्यादा समस्या दोपहिया वाहन से चलने वालों को हो रही है। जबरदस्त धूल की वजह से कई बार उन्हें वाहन रोक कर खड़े होना पड़ता है। सड़क पर जहां-तहां बड़ी मात्रा में पड़ी मिट्टी से उड़ती धूल घरों, कार्यालयों और दुकानों में भर रही है।
सड़क पर वाहनों के गुजरने और पैदल चलने के दौरान उड़ती धूल राहगीरों के फेफड़ों को प्रभावित कर ही है। इससे सबसे ज्यादा समस्या बुजुर्ग, बच्चों और महिलाओं को हो रही है। बेली अस्पताल, टीबी हॉस्पिटल तेलियरगंज, कॉल्विन, डफरिन समेत मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक जेपी मणि का कहना है कि कुछ काम चार-पांच माह में पूरा होगा जबकि अल्लापुर, सलोरी, गोविंदपुर आदि में काम पूरा होने में दो वर्ष लगेगा। लगातार मिल रही शिकायत के बाद कंपनी को नियम के तहत काम कराने की हिदायत दी गई है।
सीवर लाइन बिछाने के लिए खोदी जा रही सड़क और वहां फैली मिट्टी के कारण उड़ती धूल से वायु प्रदूषण भी लगातार बढ़ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एसबी फ्रैंकलीन पहले ही कहा चुके हैं कुछ समय में शहर की हवा में पार्टिकल मैटर (पीएम 10) की मात्रा दो से तीन गुना तक बढ़ी है, जबकि इसका मानक 2.50 से 10 माइक्रान के बीच है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि सड़क की खोदाई के दौरान धूल कम उड़े, इसके लिए मिट्टी पर पानी का लगातार छिड़काव होना चाहिए।
‘सीवर लाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों के रिस्टोरेशन का काम मानक के अनुरूप नहीं हो रहा है। अधिकतर स्थानों पर खोदाई के बाद मिट्टी बेतरतीब ढंग से छोड़ दी गई है, जिससे दुर्घटनाएं हो रही हैं। सभी स्थानों पर मेन लाइन न डालकर ब्रांच लाइन बिछाई जा रही है। मेन लाइन का काम रोक कर अन्य स्थानों पर काम प्रारंभ होने से बिछाई गई लाइनों का लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक को निरीक्षण कर सड़कों के रिस्टोरेशन के काम एवं जगह-जगह पड़ी मिट्टी तत्काल हटवाने को कहा गया है।’
0 अभिलाषा गुप्ता नंदी, महापौर
‘ेबीते कुछ समय में अस्पतालों में आने वाले मरीजों में एलर्जिक समस्याएं बढ़ी हैं। इसका कारण सड़क पर उड़ती धूल है। सीओपीडी और अस्थमा के मरीजों में समस्या ज्यादा है। सांस के जरिए धूल के कण शरीर में पहुंचकर एलर्जी पैदा कर रहे हैं। इससे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। जुकाम और खांसी की समस्याएं भी बढ़ी हैं। सांस संबंधी परेशानियों के अलावा आंखों में धूल के कण पहुंचकर कई तरह की परेशानियां पैदा कर रहे हैं।’
0 डॉ.तारिक महमूद,
अध्यक्ष, टीवी एवं चेस्ट रोग विभाग, स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय
‘धूल की वजह से आंखों का लाल होना, इंफेक्शन, खुजली जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। आंखों की पुतली पर भी धूल का असर पड़ रहा है। धूलों से त्वचा की बीमारियों का खतरा भी बढ़ा है। खुदाई के चलते जगह-जगह गड्ढे होने से दुर्घटनाएं भी बढ़ गई है। कई लोगों को फैक्चर का शिकार होना पड़ा है।’
डॉ.एके अखौरी, नेत्र रोग विशेषज्ञ, तेज बहादुर सप्रू चिकित्सालय
‘चारपहिया और दुपहिया वाहनों के लिए धूल बेहद खतरनाक हैं। इससे चारपहिया वाहनों का एसी-ब्लोअर चोक हो जा रहा है। एयर फिल्टर भी जल्दी-जल्दी गंदा हो रहा है। इसका असर वाहन के पिकप और माइलेज पर पड़ रहा है। इन दिनों गाड़ियों में इस तरह की शिकायतें काफी अधिक आ रही हैं।’
0 योगेश शुक्ला, सर्विस एडवाइजर ग्रीनलैंड मोटर्स वर्कशॉप