शासन की ओर से जिलाधिकारियों को निर्देश हैं कि इस बार यूपी बोर्ड परीक्षा में नकल पर नियंत्रण होना चाहिए, लेकिन परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में जिस कदर गड़बड़ियां हैं, उससे नकल रुक पाने की संभावना कम है। आलम ये है कि परीक्षा 18 फरवरी से शुरू हो रही है और अभी तक केंद्रों की मंडलवार संख्या कोई बताने को तैयार नहीं है। इस काम को बोर्ड को नवंबर में ही पूरा कर लेना था। बोर्ड के सूत्र ही बता रहे हैं कि माननीयों के दबाव में कई वित्तविहीन विद्यालयों को केंद्र बनाया जा रहा है
यूपी बोर्ड की ओर से परीक्षा केन्द्रों को लेकर अंतिम फैसला लेने में हो रही देरी के पीछे प्रमुख कारण कुछ विद्यालय हैं, जिनके प्रबंधन अभी भी केन्द्र बनाए जाने की आस लगाए हुए हैं। शासन की ओर से तय गाइड लाइन को लचीला बनाकर दागी और डिबार विद्यालयों को केन्द्र बनाए जाने के निर्णय के बाद दूसरे विद्यालयों के प्रबंधन को उम्मीद है। ऐसे में उन्होंने भी एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। बोर्ड की ओर से यदि अंतिम दौर में परीक्षा केन्द्र बनाया गया तो इन पर नकल रोक पाना बोर्ड एवं प्रशासन के लिए कठिन चुनौती होगी।
बोर्ड के अधिकारी मानते हैं कि कुछ वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधन परीक्षा केन्द्र नहीं बनाए जाने पर शासन एवं सरकार में अपने संपर्क के जरिए दबाव बनाने पर लगे हैं। ऐसे में परीक्षा केन्द्रों को लेकर बदलाव की संभावना है। यूपी बोर्ड की ओर से 2015 की बोर्ड परीक्षा में भी अंतिम समय में 100 से अधिक परीक्षा केन्द्र राजनीतिक दबाव में बनाए गए थे।