जैसी संभावना जताई जा रही थी, वैसा ही हुआ। मौनी अमावस्या का स्नानपर्व सोमवार (आठ फरवरी) को है, सो इस दिन का खास महत्व है। ऐसे में अफसर अनुमान लगा रहे थे कि श्रद्धालुओं की भीड़ अपेक्षा से अधिक जुटेगी। स्नानपर्व की पूर्व संध्या यानी रविवार को ही मेले में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। देर रात तक घाट स्नानार्थियों की भीड़ से खचाखच भर गए। खास यह कि इस दौरान गंगा का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में स्नानार्थियों को मौनी अमावस्या के दिन पर्याप्त और स्वच्छ जल मिलेगा।
मेला क्षेत्र की हर सड़क और पांटून पुल रविवार को ही श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भरे रहे। भीड़ सिर्फ मेले में नहीं, बल्कि शहर की उन सड़कों पर भी नजर आई, जो मेले की ओर जाती हैं। रेलवे स्टेशन और बस अड्डों के बाहर भी जबर्दस्त भीड़ रही। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बसों और अपने वाहनों पर सवार होकर मेले तक पहुंचे। दोपहर तक परेड मैदान पर बनाई गई पार्किंग में जगह खत्म हो गई। इमरजेंसी में सीएमपी डिग्री कॉलेज और केपी इंटर कॉलेज में पार्किंग की वैकल्पिक व्यवस्था की गई। शाम तक वैकल्पिक पार्किंग में भी जगह बहुत कम बची और वाहनों सड़क किनारे खड़े कराए गए। उधर, परेड मैदान पर श्रद्धालुओं के टिकने के लिए स्थापित किए गए अतिरिक्त 450 टेंट भी खचाखच भर गए। टेंटों में जगह नहीं बची तो श्रद्धालुओं ने खुले आसमान के नीचे रात बिताई। सोमवार को भीड़ और बढ़ेगी। ऐसे में प्रशासन के लिए चुनौती भी बढ़ गई है।
हालांकि अफसर इस बात को लेकर रात की सांस ले रहे हैं कि शनिवार सुबह नौ बजे से रविवार शाम तक गंगा के जलस्तर में तकरीबन 25 सेमी की वृद्धि हुई है और मेले के सबसे बड़े स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं के स्नान के लिए अब जल की कमी को लेकर हल्ला नहीं मचेगा। डीएम संजय कुमार ने बताया कि रविवार देर रात तक जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से मौनी अमावस्या पर पर्याप्त जल उपलब्ध रहेगा। संगम घाट की लंबाई में भी खासा इजाफा किया गया है। साथ ही घाटों की संख्या 14 से बढ़ाकर 17 कर दी गई है। ऐसे में स्नानघाटों पर जगह की भी कमी नहीं होगी। मेले की सुरक्षा के भी पूरे इंतजाम है। फोर्स सक्रिय है। जगह-जगह सीसी टीवी कैमरे लगाए गए हैं और हर संदिग्ध पर पैनी नजर रखी जा रही है। इसके अलावा रेलवे अफसरों से भी प्रशासन लगातार संपर्क में है। रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर मजिस्ट्रेट स्तर के अफसर कैम्प कर रहे हैं।