ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर शंकरचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने दो टूक कहा है कि अयोध्या में राम जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ है, अब तीन टुकड़ों में बंटी भूमि के बारे में अदालत के निर्णय की प्रतीक्षा है। इस मुद्दे पर विचार होते ही मंदिर निर्माण आरंभ कर दिया जाएगा। यहां पर कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर की तर्ज पर राम के बाल रूप यानी माता कौशल्या की गोद में बैठे राम का मंदिर बने।
संगम की रेती पर शनिवार को आयोजित सनातन धर्म संसद में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद का नाम लिए बिना दो टूक कहा कि राजनीतिक दल, राम मंदिर निर्माण को सत्ता की सीढ़ी न बनाएं। रामजन्म भूमि सिर्फ हिन्दुओं की है। वहां कभी कोई मस्जिद थी ही नहीं, ऐसे में मुसलमानों से मंदिर निर्माण के लिए सहयोग का कोई औचित्य नहीं है। जिस तरह हम त्रिवेणी स्नान को आए हैं, वैसे ही रामजन्म भूमि स्थल को देखने भी जाएंगे।
पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि राम मंदिर बनाने के बारे में सरकार की कोई मंशा नहीं है। धर्म संसद में गंगा की अविरलता, शनि ग्रह हैं देव नहीं, धर्मान्तरण पर रोक, परंपरागत तरीके से शवदाह, गंगा का बहिष्कार करने वालों का बहिष्कार, स्वयंभू पदाधिकारियों पर पाबंदी जैसे पंद्रह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने धर्मसंसद का संयोजन और शंकराचार्य केशिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संचालन किया। धर्मसंसद में सभी अखाड़ों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में दंडी संन्यासी, कल्पवासी, श्रद्धालु मौजूद थे।
00 धर्म संसद में पारित प्रस्ताव 0 गौमुख से लेकर गंगासागर तक अविरल बहे गंगा0 संपूर्ण देश में गोहत्या एवं गोवंश का संकरीकरण बंद हो0 रामजन्म भूमि पर बने ब्रह्म/बालक राम का भव्य मंदिर0 सनातनी परंपराओं में हस्तक्षेप बंद हो0 धर्मान्तरण, अर्थान्तरण एवं प्रतीकांतरण बंद हो0 विद्यालयों में धार्मिक सद्ग्रंथों का अध्ययन=अध्यापन0 पुराने अधिगृहीत मंदिर हिंदू समुदायों को वापस मिले, नए मंदिरों का अधिग्रहण बंद हो0 स्वयंभू पदाधिकारियों पर अंकुश लगाया जाए0 सर्व प्राचीन और आधारभूत भाषा संस्कृत को बढ़ावा मिले0 सनातनी वर्णाश्रम व्यवस्था की अच्छाइयों का अधिकाधिक प्रचार0 मौनी अमावस्या को कम से कम दोपहर दो बजे तक मौन रहें0 समान नागरिक संहिता का प्रारूप स्पष्ट हो0 सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर धर्म विरुद्ध बातों का गरिमापूर्ण प्रत्युत्तर दें0 भारतीय संस्कृति में स्त्री-पुरुष समान नहीं अपितु एक दूसरे के पूरक