संगम की रेती पर बृहस्पतिवार को एक बार फिर गंगा की निर्मलता-अविरलता का मुद्दा उठा। माघ मेले में समाधि मठ शिविर में विशिष्ट संन्यासी सम्मान समारोह के दौरान काशी सुमेरू पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने दो टूक कहा, गंगा की अविरलता निर्मलता जरूरी है। उन्होंने कानपुर के वाजिदपुर में अस्थायी बांध बनाकर गंगा को अविरलता को बाधित किए जाने पर चिंता जताई। कहा, गंगा की निर्मलता के लिए इसकी अविरलता जरूरी है जिसके लिए गंगा पर बनने वाले किसी भी तरह से बांध पर रोक लगनी चाहिए। गंगा देशवासियों के लिए जीवनदायिनी है, उसके प्रवाह को बाँधना पाप है।
शंकराचार्य ने गौ हत्या और गौ मांस निर्यात के विरोध में कानून बनाने और उसे क्रियान्वित करने की मांग की। कहा, वर्तमान समाज में संन्यासियों का दायित्व बढ़ गया है। भौतिकवाद के बढ़ते प्रभाव और चकाचौंध भरे दौर में जनता आधुनिक सुख-सुविधाओं को ही प्रमुख लक्ष्य मानकर अंधी दौड़ में है जबकि वास्तविक सुख तो आध्यात्मिक शक्ति जागृति एवं सनातन धर्म में निहित कर्म और आचरण में है।
आज विदेशी व विजातीय शक्तियां भारतीय सनातन संस्कृति को आघात पहुंचाने के प्रयास में जुटी हैं जिससे देश में अशांति, अराजकता, उग्रवाद, गौहत्या, आतंक आदि हावी हो रहा है। ऐसे में संन्यासियों की जिम्मेदारी है कि वे संस्कृति की रक्षा करें। इस अवसर पर गंगा, गौ, गायत्री, गोविंद एवं धर्मरक्षा सामूहिक प्रस्ताव पारित हुआ। दंडीबाड़ा में स्वामी राजेश्वराश्रम के शिविर में हुई संगोष्ठी में अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति के संरक्षक शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम, अध्यक्ष स्वामी विमलदेवाश्रम, महामंत्री स्वामी ब्रह्माश्रम, कोषाध्यक्ष स्वामी शंकराश्रम, प्रकाशदेवाश्रम,राकेश ब्रह्मचारी सहित अनेक दंडी संन्यासी मौजूद थे।