माघ मेले के अक्षयवट मार्ग स्थित गंगा सेना शिविर में नौ दिनी रामकथा में बृहस्पतिवार को बतौर कथाव्यास त्रिवेणी बांध स्थित बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक योगगुरु स्वामी आनंद गिरि ने कहा, रामचरित मानस सिखाती है कि सदैव मानवता ने ही दानवता का विनाश किया है। इसलिए परमात्मा को भी महामानव के रूप में आना पड़ा। जो दूसरों का दुख साझा करे, वही इंसान है और जो अपने माता-पिता की बातों को न माने तथा देव, संत, महात्माओं का अपमान करता हो, वह दानव है।
स्वामी आनंद गिरि ने कहा, जीवन मे्ं जब भक्ति जागृत होती है, तभी आनंद रूपी परमात्मा से मिलन होता है। संत कभी स्वयं के दुख से दुखित नहीं होता है। वह तो दूसरों के दुखों को अपना मानकर दूसरों को आसुरी प्रवृत्ति से दूर करने की कोशिश करता है। जो कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाता वही संत दानवता को दूर करने के लिए राजा दशरथ से मानवता के कल्याण के लिए राम-लक्ष्मण को मांगता है। संतों के स्वभाव और चरित्र के कारण परमात्मा भी उनकी चरण सेवा करते हैं। कथाक्रम में रामजन्म से विवाह तक की कथा सुनाई गई। राम कथा में महाराष्ट्र के बजरंग दल प्रमुख शंकरगायकर, और शीश उपाध्याय समेत काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।