यूपी बोर्ड की परीक्षा में सामूहिक नकल की शिकायतों को देखते हुए हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा विभाग से परीक्षा केंद्र निर्धारण की नीति और नकल रोकने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को निर्देश दिया है कि वह हलफनामे के साथ कोर्ट को बताएं कि इस दिशा में क्या प्रयास किए गए हैं। याचिका पर 17 फरवरी को सुनवाई होगी।
बागपत के प्रशांत तोमर की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। याची का कहना है कि यूपी बोर्ड की परीक्षा में व्यापक पैमाने पर सामूहिक नकल होती है। इसकी वजह है कि केंद्र निर्धारण के लिए बनी नीति का पालन नहीं हो रहा है। परीक्षा केंद्रों का निर्धारण मनमाने तरीके से किया जाता है।
कई ऐसे विद्यालयों को केंद्र बना दिया जा रहा है, जहां पहले सामूहिक नकल की शिकायतें रहीं हैं। बिना भवन, फर्नीचर आदि मूलभूत सुविधाओं वाले स्कूलों को भी केंद्र बनाया जा रहा है, जबकि केंद्र निर्धारण के लिए बाकायदा नीति है। कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार से पूछा है कि केंद्रों के निर्धारण की उसकी क्या नीति है। परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किस प्रकार से किया जा रहा है। प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को इस प्रश्न पर 17 फरवरी तक जवाब दाखिल करना है।