माघ मेले के अक्षयवट मार्ग स्थित गंगा सेना शिविर में नौ दिनी रामकथा में बुधवार को बतौर कथाव्यास त्रिवेणी बांध स्थित बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक योगगुरु स्वामी आनंद गिरि ने कहा, बेटी की विदाई का मार्मिक वर्णन जैसा मानस में मिलता है, वैसा अन्यत्र दुर्लभ है। शिव विवाह और राम जन्म प्रसंग की कथा को आगे बढ़ाते हुए बोले, माता मैना ने विदाई से पहले पुत्री पार्वती को पति की आज्ञा को सर्वोपरि मानने और ससुराल के सभी सदस्यों का सम्मान करने की सीख दी थी।
स्वामी आनंद गिरि ने राम जन्म के प्रमुख उद्देश्यों जय विजय की मुक्ति, मनु शतरूपा की कामना, नारद श्राप, प्रताप भानु राजा के उद्घार को विस्तार से बताया। कहा, जब-जब धर्म की हानि होती है, ईश्वर अवतार लेकर मानवता की रक्षा करने के लिए आते हैं। राम का जन्म ही आदर्श स्थापना के लिए हुआ था। उन्होंने युवाओं को तनाव से मुक्त रहने और कैरियर में सफलता पाने के लिए राम कथा सुनने की सीख दी।
रामकथा सुनने के लिए शांतनु महाराज, दुबई से आए देवेंद्र मिश्रा, आर्मी के वरिष्ठ अधिकारी, जवानों के अतिरिक्त बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। बृहस्पतिवार को भगवान राम के नामकरण से लेकर विवाह तक की कथा सुनाई जाएगी। वहीं कधा में शामिल हुए सांसद केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, नई पीढ़ी को रामकथा के सरोकारों से जोड़ने के संकल्प के साथ गंगा सेना के शिविर में आयोजित पहल स्वागतयोग्य है। राम मंदिर निर्माण और निर्मल गंगा के लिए हर संभव कोशिश की जाएगी।