तमाम प्रयासों के बावजूद बिजली चोरी को शत प्रतिशत रोकने में नाकाम पावर कारपोरेशन अधिकारी अब जीआइएस के जरिए बिजली चोरी रोकने की कवायद में जुट गए हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक जीआइएस के जरिए शहर के प्रत्येक लाइन व केबिल पर सेटेलाइट के जरिए नजर रखी जाएगी। जीआइएस तकनीक के जरिए बिजली चोरों का चिन्हित कर उन्हें कनेक्शन देने की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि योजना अभी प्रारंभिक चरणों में है लेकिन विभागीय अधिकारियों को उम्मीद है कि भविष्य में इससे बिजली चोरी रोकने में मदद मिलेगी।
बिजली विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो इलाहाबाद मंडल में नौ लाख 85 हजार के करीब बिजली उपभोक्ता है। जहां तक इलाहाबाद शहर की बात है तो शहर में उपभोक्ताओं की वर्तमान संख्या दो लाख 65 हजार है। लेकिन शहर में 50 हजार से अधिक उपभोक्ता ऐसे है जो तमाम प्रयासों के बावजूद विभागीय अधिकारियों को ढूढ़े नही मिल रहे है। इन उपभोक्ताओं द्वारा मुफ्त में बिजली का इस्तेमाल करने से विभाग को प्रतिमाह लाखों की चपत लग रही है।
विभागीय अधिकारियों की मानें तो वर्तमान में लाइन लॉस 20 से 25 प्रतिशत है जिसे कम करने को लेकर शासन की ओर से खासा दबाव भी है। लेकिन अब विभागीय अधिकारियों ने बिजली चोरों को चिन्हित करने व उन्हें कनेक्शन देने की कवायद शुरू की है। अधीक्षण अभियंता अश्वनी कुमार ने बताया कि पूरे शहर को जीआइएस से जोड़ा जा रहा है। जीआइएस के जरिए शहर के प्रत्येक घर, पोल व लाइन की बारीकी से परीक्षण किया जाएगा। शहर केप्रत्येक मोहल्लों में विभागीय अधिकारियों की अगुवाई में टीमें उपभोक्ताओं का डाटा इकट्ठा कर रही है जिसे कंप्यूटर में फीड किया जाएगा। आरएपीडीआरपी-2 के तहत 292 करोड़ खर्च करके शहर के सभी सब स्टेशनों को अपग्रेड किया जा रहा है। जिसके तहत सभी सब स्टेशनों को कंप्यूटरीकृत करने के साथ ही अत्याधुनिक मशीनें लगायी जा रही है। सब स्टेशनों को अपग्रेड करने का जिम्मा निजी कंपनी टाटा को सौंपा गया है।