ज्योतिष्पीठ के विवाद में नया मोड़ आ गया है। बीते दिनों लंबे समय तक चली उठापटक के बूाद बुधवार को शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने महंत नरेंद्र गिरि को अखाड़ा परिषद अध्यक्ष मानने से ही इनकार कर दिया। दो टूक कहा, जब अखाड़ा परिषद का चुनाव ही नहीं हुआ तो महंत नरेंद्र गिरि को अध्यक्ष कैसे माना जा सकता है।
अलोपीबाग स्थित शंकराचार्य आश्रम में बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद है। अखाड़ा परिषद का गठन कुंभ की व्यवस्था के लिए होता है और इसके लिए सभी तेरहों अखाड़ों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी जरूरी होती है। जब तक सर्वसम्मति से इसका चुनाव नहीं हो जाता है तब तक किसी को अध्यक्ष नहीं माना जा सकता है।
वहीं महंत नरेंद्र गिरि ने उनकी बात को सिरे से खारिज करते हुए हैरानगी जताई। कहा, मैंने न्यायालय के आदेश का सम्मान किया है। यदि मैं अध्यक्ष नहीं तो स्वामी वासुदेवानंद की ओर से भगवान वेणीमाधव मंदिर में किसका सम्मान किया गया था। उज्जैन में सभी अखाड़ों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मुझे परिषद अध्यक्ष चुना गया था। बीते दिनों नासिक और अब उज्जैन में मेरे नेतृत्व में ही महाकुंभ होगा। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती शंकराचार्य ही नहीं हैं, ऐसे में न उन्हें अखाड़ों के बारे में बोलने का कोई अधिकार है और न ही उनके वक्तव्य का कोई औचित्य है।
महंत नरेंद्र गिरि को सभी अखाड़ों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में अध्यक्ष चुना गया था। आश्चर्य है कि स्वामी वासुदेवानदं सरस्वती ने ऐसा क्यों कहा मैं इस बाबत उनसे बात करूंगा।
0 स्वामी हरि गिरि, संरक्षक, जूना अखाड़ा
महंत नरेंद्र गिरि को उज्जैन में सभी तेरह अखाड़ों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में अध्यक्ष चुना गया था। परिषद के गठन को लेकर कोई विवाद नहीं है। उज्जैन कुंभ की तैयारियां उनकी ही अगुवाई में हो रही हैं।
0 महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री, मुकामी महंत, निर्मल पंचायती अखाड़ा
महंत नरेंद्र गिरि ही अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं। उन्हें उज्जैन में सभी अखाड़ों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में चुना गया था। ऐसे में अध्यक्ष पद का कोई विवाद नहीं है।
0 महंत राजेश्वरानंद सरस्वती, आनंद अखाड़ा